छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्मांतरण को लेकर दो परिवारों से मारपीट, गांव छोड़ने का आरोप

Narayanpur Religious Conversion Case: छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है।
यहां अबूझमाड़ क्षेत्र के इखनार गांव में धर्मांतरण को लेकर दो परिवारों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई और उन्हें गांव छोड़ने के लिए कहा गया।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य में धर्मांतरण का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।


📍 इखनार गांव: जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव

इखनार गांव, नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में दशकों से

  • स्वास्थ्य सुविधा
  • शिक्षा
  • पक्की सड़क
    जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा है।

इस गांव में कुल 18 घर हैं, जिनमें से दो परिवारों ने करीब पांच साल पहले ईसाई धर्म अपनाया था


⚠️ धर्मांतरण बना विवाद की जड़

ग्रामीणों का दावा है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों ने
👉 पारंपरिक देवी-देवताओं की पूजा
👉 स्थानीय धार्मिक अनुष्ठानों
👉 सामूहिक रीति-रिवाजों
का विरोध करना शुरू कर दिया था।

ग्रामीणों के अनुसार, जब इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाने की कोशिश की गई, तब तनाव और बढ़ गया।


🗣️ पीड़ित परिवारों का आरोप

धर्मांतरण कर चुके परिवारों का आरोप है कि

  • उनके साथ मारपीट की गई
  • घर का सामान बाहर फेंक दिया गया
  • राशन और जरूरी दस्तावेज जला दिए गए

एक पीड़ित ने मीडिया से कहा—

“हम चर्च में प्रार्थना के लिए जाते थे, इसी वजह से गांव के लोग हमसे नाराज थे। हमारे घर तोड़े गए और हमें गांव छोड़ने को कहा गया। हम अपनी आस्था नहीं छोड़ेंगे।”

घायल सदस्यों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।


🧑‍🤝‍🧑 ग्रामीणों का पक्ष

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वे
👉 अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना चाहते हैं।

ग्रामीणों ने कथित तौर पर ईसाई बने परिवारों से कहा कि

“अगर गांव में रहना है तो परंपराओं का पालन करना होगा।”


🚔 पुलिस की भूमिका और स्थिति

घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत की।
फिलहाल पुलिस

  • मामले को आपसी सहमति से सुलझाने
  • गांव में शांति बनाए रखने
    की कोशिश कर रही है।

👉 अब तक किसी भी पक्ष ने FIR दर्ज नहीं कराई है

पुलिस ने दोनों पक्षों को बिना आपसी वैमनस्य के साथ रहने की सलाह दी है।


🔎 क्यों अहम है यह मामला?

Narayanpur Religious Conversion Case
केवल एक गांव का विवाद नहीं है, बल्कि यह

  • आदिवासी क्षेत्रों में धर्म
  • परंपरा बनाम व्यक्तिगत आस्था
  • कानून-व्यवस्था
    से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में
👉 संवाद
👉 संवेदनशील प्रशासन
👉 और कानून का संतुलित उपयोग
सबसे जरूरी है।


📌 निष्कर्ष

नारायणपुर की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आस्था, परंपरा और सामाजिक सहअस्तित्व के बीच संतुलन कितना जरूरी है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद को शांति और कानून के दायरे में कैसे सुलझाता है।

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