UGC New Policy Controversy अब केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रही। छात्रों और शिक्षकों के विरोध के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब इस्तीफे हो रहे हैं और सरकार पर जवाब देने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, नौकरशाही में हलचल
उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में UGC की नई नियमावली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह नीति समाज के एक वर्ग के अधिकारों को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने प्रयागराज की उस घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचने का आरोप लगा था। इस संदर्भ ने धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच नाराज़गी को और हवा दी है।
प्रशासनिक हलकों में इस इस्तीफे को असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर नौकरशाही खुलकर नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रुख नहीं अपनाती।
इस्तीफे के बाद आगे क्या प्रक्रिया होती है?
प्रशासनिक नियमों के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारी का इस्तीफा पहले जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार के नियुक्ति विभाग को भेजा जाता है।
इसके बाद सरकार यह तय करती है कि इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं।
इस पूरी प्रक्रिया की कोई तय समयसीमा नहीं होती, और फैसला दिनों से लेकर महीनों तक टल सकता है।
BJP युवा मोर्चा नेता ने भी छोड़ा पद
UGC New Policy Controversy को लेकर दबाव यहीं नहीं रुका। नोएडा में BJP युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने नई UGC नीति को “काला कानून” बताते हुए कहा कि वे ऐसी व्यवस्था का समर्थन नहीं कर सकते, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।
यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सत्तारूढ़ दल के भीतर से सार्वजनिक असहमति का संकेत देता है।
केंद्रीय मंत्री की चुप्पी पर सवाल
इस बीच बिहार के हाजीपुर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय तब विवादों में घिर गए, जब उन्होंने पत्रकारों के सवालों से बचते हुए धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए।
UGC की नई नीति और देशभर में चल रहे विरोध पर बार-बार पूछे गए सवालों के बावजूद मंत्री ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। यह घटनाक्रम एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां वे धार्मिक अनुष्ठान में भी शामिल हुए।
देशभर में जारी आंदोलन, सरकार पर बढ़ता दबाव
देश के कई राज्यों में छात्र, शिक्षक और विपक्षी दल नई UGC नीति के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर चुके हैं।
आलोचकों का कहना है कि नीति से शिक्षा में समान अवसर, पहुंच और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
वहीं सरकार इसे शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार बता रही है, लेकिन स्पष्ट संवाद और पारदर्शिता की कमी के चलते जन असंतोष गहराता जा रहा है।
नीति बहस अब निर्णायक मोड़ पर
सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, BJP युवा नेता की नाराज़गी और मंत्रियों की चुप्पी ने यह साफ कर दिया है कि UGC New Policy Controversy अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
अब सवाल यही है कि क्या केंद्र सरकार समय रहते स्पष्ट और ठोस जवाब दे पाएगी, या यह असंतोष और व्यापक रूप लेगा।
