गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने दिखाया ‘वंदे मातरम्’ का मंत्र, जनजातीय वीरों और नए न्याय तंत्र को दी श्रद्धांजलि

Chhattisgarh Republic Day Tableau: गणतंत्र दिवस पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने दर्शकों का ध्यान अपनी गहरी ऐतिहासिक चेतना और भावनात्मक प्रस्तुति से आकर्षित किया। “The Mantra of Freedom – Vande Mataram” थीम पर आधारित इस झांकी ने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, बलिदान और भारत की न्यायिक प्रगति को एक ही मंच पर सजीव कर दिया।


वीर गुंडाधुर और भूमकाल विद्रोह की जीवंत झलक

Chhattisgarh Republic Day Tableau के अग्रभाग में वीर गुंडाधुर की भव्य प्रतिमा दिखाई दी, जो धुर्वा समुदाय के महान नेता और 1910 के भूमकाल विद्रोह के नायक थे।
भूमकाल—अर्थात अन्याय के विरुद्ध सामूहिक जनआंदोलन—जनजातीय एकता का प्रतीक था। झांकी में आम की टहनी और सूखी लाल मिर्च जैसे प्रतीकों के माध्यम से विद्रोह की चेतना, जनजागरण और प्रतिरोध की भावना को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।

इतिहास साक्षी है कि इस आंदोलन की तीव्रता इतनी व्यापक थी कि ब्रिटिश सेना को नागपुर से बुलाना पड़ा, लेकिन वीर गुंडाधुर जीवनभर अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आए—यह उनकी अद्भुत रणनीति और साहस का प्रमाण है।


शहीद वीर नारायण सिंह: छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद को नमन

झांकी के पिछले हिस्से में घोड़े पर सवार, तलवार थामे शहीद वीर नारायण सिंह का दृश्य भावनाओं को झकझोर देता है।
बिंझावर जनजाति के इस महानायक ने 1856 के अकाल में गरीबों को अनाज बांटने के कारण गिरफ्तारी झेली। बाद में उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में 500 सैनिकों की सेना संग अंग्रेजों से मुकाबला किया।

10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक में उनका बलिदान हुआ, और वे छत्तीसगढ़ के पहले शहीद के रूप में अमर हो गए।


डिजिटल संग्रहालय में सहेजी गई जनजातीय वीरता

झांकी में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय को भी दर्शाया गया।
नवा रायपुर, अटल नगर में स्थित यह देश का पहला डिजिटल जनजातीय संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के अवसर पर किया था। यह संग्रहालय जनजातीय आंदोलनों की एकता, शौर्य और स्वतंत्रता के प्रति अडिग संकल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।


नए आपराधिक कानून: आधुनिक और नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली

झांकी के दूसरे भाग में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत भारत की नई न्याय व्यवस्था को दर्शाया गया।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुए—को औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर आधुनिक भारत की न्याय प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया गया।

नए संसद भवन पर स्थापित तीनों कानून पुस्तकों का प्रतीक यह दर्शाता है कि संविधान के मूल्यों के साथ न्यायिक सुधार भारत की लोकतांत्रिक शक्ति का आधार हैं।


फोरेंसिक जांच और विज्ञान आधारित न्याय

झांकी के मध्य भाग में आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों से जांच करता विशेषज्ञ, उंगलियों के निशान और वैज्ञानिक साक्ष्य दर्शाए गए। यह इस बात का संकेत है कि भारत का नया न्याय तंत्र वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित हो चुका है।


परंपरा, बलिदान और भविष्य का संगम

कुल मिलाकर, Chhattisgarh Republic Day Tableau ने यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष, न्याय और संविधान में आस्था की जीवंत प्रक्रिया है।
छत्तीसगढ़ की झांकी ने परंपरा और आधुनिकता को जोड़ते हुए राष्ट्रभक्ति की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की।

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