राज्यपाल रमेन डेका बोले—डिजिटल युग में भी प्रिंट और साहित्य की प्रासंगिकता अटल

डिजिटल और इंटरनेट से भरी दुनिया के बीच भी प्रिंट और साहित्य का महत्व कभी कम नहीं होगा—यह विचार राज्यपाल श्री रमेन डेका ने व्यक्त किए। वे नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय Raipur Sahitya Utsav 2026 ‘आदि से अनादि’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला सशक्त माध्यम हैं। जिस प्रकार संगीत के सात स्वर मनुष्य को जोड़ते हैं, उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान हमें सीखने और समझने का अवसर देता है।


तीन दिन, अनेक विचार और सार्थक संवाद

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बीते तीन दिनों में इस मंच पर अत्यंत सार्थक चर्चाएं हुईं। साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े विषयों पर खुले विचारों का आदान-प्रदान देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि यह उत्सव साहित्य प्रेमियों के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सीखने और आत्ममंथन का अनुभव रहा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ और देशभर से आए प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने पुस्तकों का समृद्ध संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई किताबों से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिला, जो यह दर्शाता है कि किताबों के प्रति रुचि आज भी जीवित है


साहित्य और संगीत का उत्सव निरंतर होना चाहिए – राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और संगीत का आदान-प्रदान समाज के लिए आवश्यक है। ऐसे आयोजन केवल राजधानी तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के शहरों और गांवों तक पहुंचने चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे उत्सव सरकारी आयोजन न होकर समुदाय की सहभागिता से होने चाहिए, ताकि साहित्य जन-जन से जुड़े।


छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन विरासत को सहेजने की जरूरत

राज्यपाल श्री डेका ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन संस्कृति और साहित्य को भूलती जा रही है। जबकि यह राज्य सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए, ताकि राज्य के बाहर के लोग भी इसकी पहचान और गौरव से परिचित हो सकें।


शब्द ब्रह्म हैं, साहित्य जोड़ने का कार्य करता है

राज्यपाल ने कहा कि शब्दों में अपार शक्ति होती है। शब्द का स्वरूप ब्रह्म है। उन्होंने बंकिमचंद्र चटर्जी के ‘वंदे मातरम्’ का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल दो शब्दों ने पूरे देश को जागृत कर दिया था।

उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, सोचने की नई दिशा देता है और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें जो निःस्वार्थ हो, क्योंकि ऐसे कार्य समाज और राष्ट्र को मजबूती प्रदान करते हैं।


छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा – ओ. पी. चौधरी

विशिष्ट अतिथि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की परंपरा सदैव समृद्ध रही है। कालिदास और रविंद्रनाथ टैगोर जैसे महान साहित्यकारों का इतिहास भी इस भूमि से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इस तरह के साहित्यिक आयोजन निरंतर होते रहेंगे।


गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी और नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की।
विशिष्ट अतिथियों में फिल्म अभिनेता-निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार पंकज झा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *