Raipur Sahitya Utsav Travel Blog:
रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे और समापन दिवस पर लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित पहले सत्र में “ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक” विषय पर रोचक और प्रेरणादायी परिचर्चा हुई। इस सत्र में प्रसिद्ध ट्रैवल जर्नलिस्ट, ब्लॉगर एवं सोलो ट्रैवलर श्रीमती केनात काज़ी तथा “देसी चश्मे से लंदन डायरी” की लेखिका श्रीमती शिखा वर्ष्णेय शामिल रहीं। सत्र का संचालन श्री राहुल चौधरी ने किया।
✈️ साहित्य से यात्रा, यात्रा से लेखन
अपने अनुभव साझा करते हुए केनात काज़ी ने कहा कि हिंदी साहित्य ने उन्हें यात्रा के लिए प्रेरित किया, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओं ने उन्हें अपने अनुभवों को ब्लॉग और लेखन के रूप में दर्ज करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यात्रा लोकप्रियता के लिए नहीं, बल्कि सीखने और खोज के प्रेम से करती हैं। ब्लॉगिंग और प्रसिद्धि उनके लिए यात्रा की स्वाभाविक परिणति मात्र है।
उन्होंने सचेत पर्यटन पर जोर देते हुए कहा कि यात्रियों को किसी स्थान को केवल देखने के बजाय उसकी संस्कृति, लोगों और परिवेश में पूरी तरह डूबना चाहिए। ट्रैवल ब्लॉगिंग, किसी भी पर्यटन स्थल के प्रत्यक्ष अनुभवों को दर्ज करने का सशक्त माध्यम है।
🌍 भारत की यात्रा क्षमता को कम न आँकें
लेखिका शिखा वर्ष्णेय ने कहा कि उनकी यात्राओं और लेखन के पीछे सबसे बड़ी शक्ति जिज्ञासा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूल में शिक्षा के दौरान हिंदी साहित्य से परिचय ने उन्हें वह शब्दावली और अभिव्यक्ति दी, जिससे वे अपने अनुभवों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकीं।
उन्होंने कहा,
“दुनिया घूमने के बाद यह महसूस हुआ कि हम अक्सर अपने ही देश की पर्यटन क्षमता को कम आंकते हैं। भारत का इतिहास, संस्कृति, परंपराएं और पुरातात्विक धरोहरें इसे अद्वितीय बनाती हैं। हमें इस विरासत पर गर्व करने के साथ-साथ इसे स्वयं अनुभव भी करना चाहिए।”
🌿 बस्तर हर यात्री की सूची में हो शामिल
सत्र का संचालन करते हुए श्री राहुल चौधरी ने अपने यात्रा अनुभव साझा किए और कहा कि यात्रा लेखन में सूक्ष्म अवलोकन सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।
उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और बस्तर अंचल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता, लोकसंस्कृति और हरियाली इसे हर यात्री की मस्ट-विजिट लिस्ट में शामिल करने योग्य बनाती है।
📚 युवाओं के लिए साहित्य से जुड़ने की अपील
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने युवाओं के घटते पठन-पाठन पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत कम होने से शब्दावली सीमित हो रही है।
साथ ही, लेखकों से आग्रह किया गया कि वे युवा-मैत्री भाषा और शैली अपनाएं, ताकि नई पीढ़ी साहित्य और यात्रा लेखन से गहराई से जुड़ सके।
Raipur Sahitya Utsav Travel Blog Paryatan Ke Prerak सत्र ने यह स्पष्ट किया कि यात्रा, साहित्य और ब्लॉगिंग एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं।
जब अनुभवों को संवेदनशील भाषा मिलती है, तब वे केवल यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की जीवंत तस्वीर बन जाते हैं।
