India EU car import tariff cut: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से पहले ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर बड़ी और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर आयात शुल्क को 110% से घटाकर 40% करने पर सहमत हो गई है। आने वाले वर्षों में इसे और घटाकर 10% तक लाने की योजना है।
अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारतीय ऑटो बाजार के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुली खिड़की मानी जा रही है।
🚗 किन कारों को मिलेगी तुरंत राहत
सूत्रों ने बताया कि यह राहत फिलहाल
👉 15,000 यूरो (करीब ₹15.5 लाख) से अधिक कीमत वाली
👉 पेट्रोल और डीजल (कंबशन इंजन) कारों पर लागू होगी
सरकार की योजना के तहत हर साल लगभग 2 लाख कारों को इस नई दर पर आयात करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, कोटा और शर्तों में अंतिम समय पर बदलाव संभव है।
⚡ EV कारों को क्यों रखा गया बाहर
सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को पहले पांच वर्षों तक इस टैक्स कटौती से बाहर रखने का फैसला किया है।
इसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों जैसे
- टाटा मोटर्स
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
के निवेश और उभरते EV सेक्टर को सुरक्षा देना है। पांच साल बाद EV पर भी India EU car import tariff cut जैसी ही दरें लागू होने की संभावना है।
🤝 ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की ओर भारत-EU
भारत और EU के बीच इस बहुप्रतीक्षित समझौते को पहले ही “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है। उम्मीद है कि मंगलवार को दोनों पक्ष FTA पर सहमति की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
इस डील से
✔️ भारत के टेक्सटाइल और ज्वेलरी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा
✔️ अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी
✔️ यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी
🇪🇺 यूरोपीय कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा
कम आयात शुल्क से Volkswagen, Mercedes-Benz, BMW, Renault और Stellantis जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा होगा।
हालांकि ये कंपनियां भारत में पहले से मौजूद हैं, लेकिन ऊंचे टैक्स के कारण वे आयातित मॉडलों के जरिए बाजार विस्तार नहीं कर पा रही थीं।
अब कंपनियां
➡️ कम कीमत पर नई कारें लॉन्च कर सकेंगी
➡️ बाजार की मांग को परख सकेंगी
➡️ बाद में स्थानीय उत्पादन पर बड़ा दांव लगा सकेंगी
📊 भारतीय ऑटो बाजार की बड़ी तस्वीर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, जहां सालाना करीब 44 लाख कारें बिकती हैं।
फिलहाल बाजार पर
- मारुति सुजुकी
- टाटा मोटर्स
- महिंद्रा
का दबदबा है, जबकि यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी 4% से भी कम है।
लेकिन 2030 तक यह बाजार 60 लाख यूनिट सालाना तक पहुंचने का अनुमान है। यही वजह है कि
- Renault भारत में नई रणनीति के साथ वापसी कर रही है
- Volkswagen Group स्कोडा के जरिए नए निवेश की तैयारी में है
🔍 क्यों अहम है India EU car import tariff cut
विशेषज्ञ मानते हैं कि India EU car import tariff cut
✔️ भारतीय उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देगा
✔️ कीमतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा
✔️ भारत को वैश्विक ऑटो हब बनाने की दिशा में मदद करेगा
हालांकि, घरेलू उद्योग की सुरक्षा और रोजगार पर असर को लेकर बहस भी तेज होने की संभावना है।
