छत्तीसगढ़ में मस्जिदों-मदरसाें में तिरंगा फहराने के आदेश पर सियासत तेज, देशभक्ति पर सवाल उठाने के आरोप

Republic Day Tricolour Controversy। देशभर में 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ में मस्जिदों और मदरसों में तिरंगा फहराने को लेकर वक़्फ़ बोर्ड के आदेश ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय पर्व के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके तरीके और बयानों को लेकर असहमति और विरोध के स्वर भी उभरने लगे हैं।


🏛️ वक़्फ़ बोर्ड के आदेश के बाद बढ़ी सियासत

छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड की ओर से जारी निर्देश के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। खासतौर पर वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन डॉ. सलीम राज के बयान ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया। इसके बाद कांग्रेस सहित कई संगठनों ने इसे अनावश्यक और विवाद को जन्म देने वाला कदम बताया।


🗣️ “देशभक्ति पर संदेह खड़ा करना गलत”

रायपुर के शहर काजी अशरफ़ मियां ने इस पूरे मामले पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज की देशभक्ति पर सवाल उठाना बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिदों और मदरसों में पहले भी तिरंगा फहराया जाता रहा है और आगे भी फहराया जाएगा।

हालांकि, उनका कहना है कि देशभक्ति आदेश से नहीं, भावना से आती है। यदि कोई निर्देश जारी किया जाना है, तो वह सभी धर्मस्थलों के लिए समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वक़्फ़ बोर्ड का मूल दायित्व संपत्तियों का प्रबंधन और समाज के कल्याण से जुड़ा है, न कि ऐसे बयान देना जो विवाद को जन्म दें।


🏳️ कांग्रेस का हमला: “बयान दुर्भाग्यजनक और विभाजनकारी”

वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी भी समुदाय की देशभक्ति पर सवाल उठाना न सिर्फ गलत है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्व जोड़ने का माध्यम होते हैं, तोड़ने का नहीं


🛕 मंदिरों में वर्षों से फहराया जा रहा है तिरंगा

इस मुद्दे पर मंदिर समितियों की राय भी सामने आई है। कालीबाड़ी मंदिर समिति और सुरेश्वर महादेव मंदिर के प्रतिनिधियों ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को मंदिरों में वर्षों से नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। उनके अनुसार, यह एक स्वाभाविक परंपरा है, जिसे कभी विवाद का विषय नहीं बनाया गया।


🇮🇳 राष्ट्रीय पर्व राजनीति से ऊपर होने चाहिए

Chhattisgarh Republic Day Tricolour Controversy के बीच यह बात उभरकर सामने आई है कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व को साझा उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। तिरंगा किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान है।

देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि तिरंगे को राजनीति से दूर रखा जाए और हर नागरिक इसे सम्मान और गर्व के साथ अपनाए—यही संविधान और लोकतंत्र की सच्ची भावना है।

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