Raipur Sahitya Utsav Chhattisgarh Lokgeet:
रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन का प्रथम सत्र छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को समर्पित रहा। नवा रायपुर स्थित लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित इस सत्र में छत्तीसगढ़ के लोकगीतों पर गहन और भावपूर्ण परिचर्चा हुई। लोकगीतों के माध्यम से जनजीवन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समझने का प्रयास किया गया।
इस परिचर्चा में डॉ. पीसी लाल यादव, श्रीमती शकुंतला तरार, श्री बिहारीलाल साहू और डॉ. विनय कुमार पाठक विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने विचार साझा किए।
🎶 लोकगीत मानवता के पथप्रदर्शक
डॉ. पीसी लाल यादव ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के लोकगीत मानवता के पक्षधर हैं और समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि लोकगीतों को गर्व के साथ संजोना और आगे बढ़ाना अब युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
🌿 बस्तर के लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक यात्रा
परिचर्चा की दूसरी वक्ता श्रीमती शकुंतला तरार ने बस्तर के लोकगीतों को बेहद जीवंत अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होंने बस्तर के पारंपरिक लोकगीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने घोटुल परंपरा, लिंगोपेन देवता की पूजा, महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले ककसार गीत, आखेट पर जाते पुरुषों के लिए मंगल गीत, छेरछेरा परंपरा, जगार पर्व के धनकुल गीत और 650 वर्षों से चली आ रही बस्तर दशहरा परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
साथ ही उन्होंने बस्तर पंडुम के माध्यम से सरकार द्वारा किए जा रहे सांस्कृतिक संरक्षण प्रयासों की सराहना की।
📚 छत्तीसगढ़ी भाषा है समृद्ध और पूर्ण
श्री बिहारीलाल साहू ने युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए वर्तमान लोकगीतों, कहानियों और पहेलियों की प्रासंगिकता पर बात रखी।
उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि छत्तीसगढ़ी भाषा और लोकगीत पुराने समय से ही जनमानस के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और छत्तीसगढ़ी एक समृद्ध तथा पूर्ण भाषा है।
🪔 लोक साहित्य जन–जीवन की अभिव्यक्ति
परिचर्चा के अंतिम वक्ता डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि लोक साहित्य जन–जीवन की गहरी अनुभूतियों से उपजा समृद्ध साहित्य है।
उन्होंने लोकगीतों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए इसकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रचनात्मक महत्ता को रेखांकित किया।
📖 पुस्तकों और वीडियो का विमोचन
सत्र के अंत में डॉ. पीसी लाल यादव के छत्तीसगढ़ी गजल संग्रह ‘हमर का बने का गिनहा’ और कविता संग्रह ‘दिन म घलो अंधियार हावय’ का विमोचन किया गया।
इसके साथ ही श्रीमती वर्णिका शर्मा द्वारा निर्मित वीडियो ‘महतारी की आरती’ का भी विमोचन हुआ, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने सराहा।
Raipur Sahitya Utsav Chhattisgarh Lokgeet सत्र ने यह स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृति, संघर्ष और संवेदनाओं के जीवंत दस्तावेज हैं। इन्हें संरक्षित करना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।
