दुर्ग में मकान खाली कराने पहुंची टीम के सामने कांग्रेस महिला कार्यकर्ता ने किया आत्मदाह का प्रयास, 95% झुलसी

Durg Congress woman self immolation: छत्तीसगढ़ के स्टील सिटी दुर्ग-भिलाई से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। दुर्ग जिले के पचरीपारा इलाके में मकान खाली कराने पहुंची पुलिस और कोर्ट की टीम के सामने कांग्रेस से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने आत्मदाह का प्रयास कर लिया।

महिला ने मौके पर ही अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली, जिससे वह लगभग 95 प्रतिशत तक झुलस गई


घटना के बाद मचा हड़कंप

इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तुरंत हरकत में आए और गंभीर रूप से झुलसी महिला को दुर्ग जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से हालत गंभीर होने के कारण उसे रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

डॉक्टरों के मुताबिक महिला की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।


कौन है पीड़िता?

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता की पहचान शबाना निशा उर्फ रानी (37 वर्ष) के रूप में हुई है।
शबाना पचरीपारा इलाके में पिछले करीब 40 वर्षों से किराए के मकान में रह रही थी।

वह दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 पचरीपारा से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव भी लड़ चुकी है।


क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?

पीड़िता के मामा लियाकत अली के अनुसार, शबाना चाहती थी कि मकान मालिक उसी मकान को उसे बेच दे, ताकि वह वहीं रह सकें। लेकिन मकान मालिक इस प्रस्ताव के लिए राजी नहीं हुआ।

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश के बाद जब पुलिस और कोर्ट की टीम मकान खाली कराने पहुंची, तभी शबाना ने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

बताया जा रहा है कि पिछले 4-5 महीनों से उस पर मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थी।


पुलिस का बयान

इस मामले पर एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया:

“महिला के आत्मदाह के प्रयास की सूचना मिली थी। उसे गंभीर हालत में रायपुर रेफर किया गया है। फिलहाल स्थिति स्थिर बताई जा रही है। आगे की कार्रवाई महिला की हालत में सुधार के बाद की जाएगी।”


प्रशासन और राजनीति में हलचल

इस घटना ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। Durg Congress woman self immolation की यह घटना एक बार फिर किरायेदारी विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल खड़े कर रही है।


पचरीपारा की यह घटना बताती है कि कानूनी कार्रवाई के साथ मानवीय पहलू को समझना भी उतना ही जरूरी है। मकान विवाद जैसे मामलों में संवाद और संवेदनशीलता की कमी कई बार ऐसी भयावह स्थितियों को जन्म दे देती है।

फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें पीड़िता की हालत और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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