बसंत पंचमी पर धार में साथ-साथ पूजा और नमाज़, कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच बदला शहर का माहौल

Bhojshala Basant Panchami dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर में इस वर्ष की बसंत पंचमी पहले से ही असाधारण मानी जा रही थी। वजह साफ थी—करीब एक दशक बाद बसंत पंचमी और शुक्रवार की नमाज़ एक ही दिन पड़ रही थी। जैसे ही यह संयोग सामने आया, प्रशासन से लेकर समाज तक हर स्तर पर सतर्कता बढ़ गई।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुला रास्ता

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भोजशाला परिसर में हिंदू समुदाय को बसंत पंचमी की पूजा और मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज़ एक साथ करने की अनुमति दी जाए। यह फैसला एक याचिका पर आया, जिसमें कहा गया था कि बसंत पंचमी विद्या की देवी सरस्वती की आराधना का पर्व है।


किले में तब्दील हुआ धार शहर

शुक्रवार सुबह धार का नज़ारा बदला हुआ था।

  • पूरे शहर की 3D मैपिंग
  • 20 से अधिक AI-सक्षम ड्रोन
  • 8,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी,
  • 8 RAF कंपनियां और
  • 933 महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

कंट्रोल रूम से लाइव निगरानी हो रही थी और बख़्तरबंद वाहन हर संवेदनशील इलाके में मौजूद थे। यह सुरक्षा इंतज़ाम इस बात का संकेत थे कि प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।


दो रास्ते, दो समुदाय, एक दिन

जहाँ हिंदू श्रद्धालु मुख्य द्वार से हजारों की संख्या में भगवा ध्वजों के साथ शोभायात्रा में पहुंचे, वहीं मुस्लिम समुदाय के 15–17 लोगों को पीछे के गेट से सीमित संख्या में नमाज़ के लिए लाया गया।

सुरक्षा कारणों से मस्जिद के गुंबद को सफेद कपड़े से ढक दिया गया था और चारों ओर हथियारबंद जवान तैनात थे।


श्रद्धा से ज्यादा अधिकारों की बात

भीड़ में खड़े शांतीलाल अपने बेटे के साथ बोले,

“हम किसी से विवाद नहीं चाहते। बस हमें पूरे साल पूजा करने का अधिकार चाहिए।”

वहीं कुछ लोग भीड़ देखकर लौट गए। शिवानी ने कहा,

“माहौल बड़ा है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पहले है।”


नमाज़ को लेकर उठे सवाल

नमाज़ के लिए चुने गए कुछ लोगों ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। इमरान खान का कहना था कि तय प्रक्रिया के बावजूद वे नमाज़ अदा नहीं कर सके।

हालांकि धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि

“सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन हुआ और कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा।”


पुराना विवाद, नया मोड़

भोजशाला को लेकर विवाद 2000 के दशक से जारी है।

  • 2003 में ASI ने मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज़ का फार्मूला तय किया था।
  • 2022 में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई।
  • 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर हुए ASI सर्वे में कहा गया कि संरचना पुराने मंदिरों के हिस्सों से बनी है।

इसी रिपोर्ट के बाद Bhojshala Basant Panchami dispute राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।


स्थानीय लोग क्या कहते हैं?

57 वर्षीय व्यापारी सीताराम कहते हैं,

“पहले बसंत पंचमी एक साधारण उत्सव था। अब यह राजनीति और राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया है।”


आस्था के साथ संतुलन की परीक्षा

इस वर्ष की बसंत पंचमी ने दिखा दिया कि भोजशाला अब सिर्फ धार का मुद्दा नहीं रहा। सुप्रीम कोर्ट का आदेश, प्रशासन की तैयारी और समाज की प्रतिक्रिया—सबने मिलकर इसे एक राष्ट्रीय प्रतीकात्मक क्षण बना दिया।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह सह-अस्तित्व स्थायी समाधान की ओर बढ़ता है या विवाद की नई परतें खोलता है।

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