गोटी बांध गांव में मातम, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने परिजनों को सौंपे 20-20 लाख रुपये

Chhattisgarh Steel Plant Blast: बिहार के गयाजी जिले के नक्सल प्रभावित डुमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत गोटी बांध गांव में गहरा शोक व्याप्त है।
गुरुवार को छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार स्थित एक निजी स्टील प्लांट में हुए भीषण ब्लास्ट हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया।

इस दर्दनाक हादसे में गांव के छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।


परिजनों से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी

हादसे की जानकारी मिलते ही शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी गोटी बांध गांव पहुंचे।
उन्होंने मृतक मजदूरों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

केंद्रीय मंत्री को सामने देखकर परिजन भावुक हो उठे। रोते-बिलखते परिजनों ने अपने भविष्य और परिवार की आजीविका को लेकर चिंता जाहिर की।


मृतक परिवारों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

परिजनों की पीड़ा सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सभी मृतकों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये का चेक सौंपा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि—

  • केंद्र सरकार
  • बिहार सरकार
  • और छत्तीसगढ़ सरकार

तीनों मिलकर पीड़ित परिवारों की हर संभव सहायता करेंगी।


लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस Chhattisgarh Steel Plant Blast में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने दोहराया कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।


हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के नाम

इस भीषण औद्योगिक हादसे में गोटी बांध गांव के जिन मजदूरों की मौत हुई, उनमें—

  • 22 वर्षीय श्रवण कुमार
  • राजदेव कुमार
  • 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार
  • 42 वर्षीय बदरी भुईया
  • 40 वर्षीय विनय भुईया
  • 40 वर्षीय सुंदर भुईया

शामिल हैं।
वहीं कल्पू भुईया और रामू भुईया भी इस हादसे से प्रभावित बताए गए हैं।


शव गांव पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब

मृतकों के शव गांव पहुंचते ही गोटी बांध गांव में कोहराम मच गया
अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों के साथ-साथ पूरे इलाके की आंखें नम रहीं। गांव में हर ओर सन्नाटा और शोक का माहौल बना हुआ है।


औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा और प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पीड़ित परिवारों को सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि न्याय भी मिलेगा।

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