दुर्ग में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर स्मरणोत्सव, विद्यार्थियों ने बढ़ाया देशभक्ति का मान

दुर्ग, 21 जनवरी 2026

राष्ट्रीय गीत Vande Mataram 150th Anniversary के अवसर पर आज दुर्ग जिला पंचायत के सभाकक्ष में एक गरिमामय स्मरणोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि नई पीढ़ी के मन में देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय चेतना का संचार करने वाला अवसर भी बना।

कार्यक्रम में जिले के स्कूलों, एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। विशेष रूप से सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों ने बैण्ड के माध्यम से वंदे मातरम् की मधुर धुन प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।


🇮🇳 “वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है” – ललित चंद्राकर

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री ललित चंद्राकर ने कहा कि

“वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। इसकी 150वीं वर्षगांठ हमें राष्ट्र की एकता, आत्मगौरव और मातृभूमि के प्रति समर्पण का स्मरण कराती है।”

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और उनके भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करते हैं।


🌍 सामूहिक गायन से बन रहा देशभक्ति का वातावरण

कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक है।
उन्होंने जानकारी दी कि जिले में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे समाज में सकारात्मक और देशभक्ति का वातावरण निर्मित हो रहा है।


📜 वंदे मातरम् के इतिहास पर प्रकाश

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ तेलधानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू ने वंदे मातरम् के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में इसके महत्व को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह गीत आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।


👥 ये रहे प्रमुख उपस्थितजन

कार्यक्रम में

  • मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत – श्री बजरंग दुबे
  • जिला शिक्षा अधिकारी – श्री अरविंद मिश्रा
  • विभिन्न विभागों के अधिकारी
  • गणमान्य नागरिक एवं शिक्षकगण

उपस्थित रहे।


Vande Mataram 150th Anniversary का यह स्मरणोत्सव केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं था, बल्कि भविष्य की पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की लौ जलाने का सशक्त माध्यम भी बना। विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि वंदे मातरम् आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।

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