Bhupesh Baghel on paddy procurement: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस धीमी रफ्तार से धान खरीदी हो रही है, उससे तय समय में लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं दिखता।
उनका कहना है कि सरकार की नीयत ठीक नहीं लग रही, और इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है।
टोकन, रकबा और लिमिट बनी किसानों की सबसे बड़ी परेशानी
Bhupesh Baghel on paddy procurement को लेकर बोले कि धान खरीदी शुरू हुए 50 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज भी हजारों किसान परेशान हैं।
उन्होंने बताया कि —
- एग्री स्टेक पोर्टल की खामियों से किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा
- कई किसानों का रकबा कम दिखाया जा रहा है
- खरीदी केंद्रों में लिमिट नहीं बढ़ाई जा रही
- धान का समय पर उठाव नहीं हो रहा
इन्हीं वजहों से धान खरीदी केंद्रों में जाम की स्थिति बनी हुई है और खरीदी बार-बार बाधित हो रही है।
150 किलोमीटर चलकर भी नहीं मिली सुनवाई
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांकेर जिले के ग्राम बारकोट का उदाहरण देते हुए कहा कि किसान अपनी समस्या लेकर 150 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर से मिले, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि लगभग हर गांव में हालात ऐसे ही हैं। किसान आक्रोशित हैं, कई जगह आंदोलन हो रहे हैं, फिर भी सरकार उनकी आवाज नहीं सुन रही।
“27 लाख किसान तय तारीख तक धान नहीं बेच पाएंगे”
भूपेश बघेल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब तक की धान खरीदी की स्थिति देखकर साफ है कि प्रदेश के 27 लाख से अधिक किसान तय समय में अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे।
इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा और वे कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।
“भाजपा चाहती है किसान औने-पौने दाम पर बेचें धान”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों को आर्थिक रूप से तंगहाल करना चाहती है।
भूपेश बघेल के अनुसार, सरकार चाहती है कि किसान हताश होकर अपनी फसल बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेच दें, ताकि सरकार को ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान न करना पड़े।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि —
- धान खरीदी की लिमिट तुरंत बढ़ाई जाए
- एग्री स्टेक पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर की जाएं
- धान का उठाव तेज किया जाए
ताकि किसानों को राहत मिल सके और वे अपनी मेहनत का पूरा दाम पा सकें।
