Chhattisgarh Mineral Development: छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहाँ खनिज केवल ज़मीन के नीचे नहीं, बल्कि विकास की रीढ़ बन चुके हैं। राज्य सरकार की सुनियोजित खनन नीति और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया ने बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ को खनिज विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
🔹 28 से अधिक खनिज, बढ़ता भरोसा और तेज़ राजस्व वृद्धि
सचिव खनिज संसाधन श्री पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज उपलब्ध हैं। राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए खनिज ब्लॉकों की पारदर्शी नीलामी और वैज्ञानिक उत्खनन के कारण पिछले दो वर्षों में खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व 429 करोड़ रुपये था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 तक यह बढ़कर 14,592 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। वहीं 2025-26 में दिसंबर तक 10,345 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है और वर्ष के अंत तक 17,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है।
🔹 लीथियम नीलामी करने वाला देश का पहला राज्य
छत्तीसगढ़ ने इतिहास रचते हुए लीथियम खदान की नीलामी करने वाला देश का पहला राज्य बनने का गौरव हासिल किया है। कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में लीथियम और दुर्लभ खनिजों की नीलामी से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
यह पहल National Critical Minerals Mission और Developed India 2047 के विज़न से सीधे जुड़ी है।
🔹 CMDC: खनिज विकास की धुरी
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2001 में गठित छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) आज खनन, मार्केटिंग, अन्वेषण और संयुक्त उपक्रमों के ज़रिए राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।
वर्तमान में CMDC द्वारा टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कोयला, हीरा, मैंगनीज, कॉपर, डोलोमाइट और कोरंडम जैसे 9 प्रमुख खनिजों में कार्य किया जा रहा है।
🔹 जनजातीय जीवन में टिन बना आजीविका का आधार
बस्तर अंचल में टिन खनिज ने जनजातीय परिवारों की तस्वीर बदल दी है। CMDC द्वारा टिन का क्रय मूल्य 3 गुना बढ़ाकर 1926 रुपये प्रति किलो किया गया है।
अब ऑनलाइन खरीद और रियल-टाइम भुगतान से आदिवासी हितग्राहियों को समय पर उचित मूल्य मिल रहा है।
इसके लिए TIN – Tribal Incentive for Natural Resources Portal विकसित किया जा रहा है।
🔹 पारदर्शी नीलामी से रिकॉर्ड राजस्व
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में CMDC ने MSTC के माध्यम से तकनीक-आधारित नीलामी को अपनाया।
परिणामस्वरूप—
- लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड बिक्री मूल्य
- न्यूनतम उत्खनन दर
- आरीडोंगरी खदान से 28.65 करोड़ रुपये का राजस्व
- 200+ लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार
🔹 क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता की ओर
CMDC, Coal India, MOIL और NMDC के साथ मिलकर मैंगनीज, ग्रेफाइट, लीथियम, टेंटलम और नियोबियम जैसे क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण में जुटा है।
बैलाडिला डिपॉजिट-4 और 13 में 2026 से उत्पादन शुरू होने पर—
- राज्य को लगभग 7000 करोड़ रुपये
- CMDC को 3000 करोड़ रुपये
का संभावित राजस्व मिलेगा।
🔹 भविष्य की कार्ययोजना: खनन से परे सोच
CMDC की भविष्य की रणनीति केवल खनन तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं—
- उत्पादन क्षमता 5 लाख टन से 20 लाख टन
- स्लैग से क्रिटिकल मिनरल निष्कर्षण
- ड्रोन सर्वे, वेब्रिज, चेकगेट सेवाएं
- बंद खदानों का पुनरुद्धार
- कौशल विकास और स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण
🔹 विकास की कहानी जो ज़मीन से ज़िंदगी तक पहुँची
खनिज अब केवल संसाधन नहीं, बल्कि रोज़गार, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का माध्यम बन चुके हैं।
छत्तीसगढ़ की यह खनिज यात्रा बताती है कि नीति, पारदर्शिता और मानवीय सोच जब साथ हों, तो धरती भी भविष्य गढ़ती है।
