नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर के स्कूलों में सौर ऊर्जा से जली शिक्षा की नई रोशनी

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और घने जंगलों से घिरे मोहला-मानपुर क्षेत्र में अब शिक्षा की नई सुबह हो रही है। वर्षों से अंधेरे में पढ़ने को मजबूर रहे सरकारी स्कूलों में अब सौर ऊर्जा से रोशनी फैल चुकी है। इस पहल को Solar Schools in Chhattisgarh के नाम से देखा जा रहा है, जो दूरस्थ इलाकों के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है।


चार स्कूल, जहाँ पहली बार पहुंची बिजली

गट्टेपाली, संबलपुर कोरचा, बोदरा और गट्टेगहना — ये चार सरकारी स्कूल हाल ही तक बिना बिजली के थे।
बरसात और सर्दी के मौसम में अंधेरे कमरों में पढ़ाई करना बच्चों के लिए बेहद कठिन था। कई बार तो पढ़ाई लगभग रुक सी जाती थी।


CREDA और शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

अब इन स्कूलों में 1.2 किलोवाट के ऑफ-ग्रिड सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं। यह कार्य शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (CREDA) के सहयोग से हुआ है।

कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने कहा,

“यह पहल दूरदराज़ क्षेत्रों के बच्चों को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सौर ऊर्जा ने न केवल कक्षाओं को रोशन किया है, बल्कि बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल किया है।”


अब बच्चे उजाले में पढ़ रहे हैं

छात्रा सुरेखा टेकाम बताती हैं,

“पहले स्कूल में बिजली नहीं थी। अंधेरे में पढ़ते थे। अब लाइट और पंखे हैं, बहुत अच्छा लगता है।”

वहीं छात्र रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं,

“अब पढ़ाई आसान और मज़ेदार हो गई है।”


शिक्षकों में भी नई ऊर्जा

शिक्षक ब्रह्मा ठाकुर कहते हैं,

“जब मैं यहाँ आया था, बिजली नहीं थी। अब लाइट और पंखे लग गए हैं। बच्चे पहले से ज्यादा मन लगाकर पढ़ रहे हैं।”


Solar Schools in Chhattisgarh से बदली तस्वीर

इस पहल से नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा का माहौल बदल रहा है।
Solar Schools in Chhattisgarh केवल बिजली नहीं दे रहा, बल्कि यह बच्चों को सुरक्षित, सुविधाजनक और प्रेरक वातावरण भी प्रदान कर रहा है।


जहाँ कभी अंधेरा और डर था, वहाँ अब उजाला और उम्मीद है।
मोहला-मानपुर के इन स्कूलों में सौर ऊर्जा ने साबित कर दिया है कि विकास अगर सही दिशा में हो, तो सबसे दूरस्थ इलाकों तक भी उसकी रोशनी पहुँच सकती है।

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