कलमा बैराज के नीचे सैंड बंड से ओडिशा-छत्तीसगढ़ वार्ता पर संकट

रायपुर।
जहां एक ओर Mahanadi Water Dispute को सुलझाने के लिए ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकारें संवाद की राह पर आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कलमा बैराज से करीब 12 किलोमीटर नीचे सैंड बंड (रेत का बांध) बनाए जाने की खबरों ने इन प्रयासों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ओडिशा सरकार पहले ही यह चिंता जता चुकी है कि छत्तीसगढ़ द्वारा बनाए जा रहे कलमा बैराज और अन्य अपस्ट्रीम परियोजनाएं महानदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेंगी। इसका सीधा असर हिराकुंड बांध, सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति पर पड़ेगा।


🌊 हिराकुंड और किसानों पर बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कलमा बैराज के नीचे सैंड बंड तैयार होता है, तो ओडिशा की ओर आने वाला पानी और कम हो जाएगा। इससे तटीय जिलों के किसानों और लाखों लोगों की जल निर्भरता पर संकट गहराएगा।

यही कारण है कि Mahanadi Water Dispute अब केवल राज्यों के बीच विवाद नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।


🏛️ जनवरी के अंत में होगी अहम बैठक

राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालयी समिति जनवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक करेगी।
इस बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा उदंती नदी पर बैराज और कलमा में सैंड बंड जैसे ताजा कदमों की समीक्षा होगी।

क्योंकि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई 7 फरवरी को है, इसलिए यह बैठक दोनों राज्यों की रणनीति तय करने में निर्णायक मानी जा रही है।


महानदी बचाओ आंदोलन की चेतावनी

इस बीच, महानदी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुदर्शन दास ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे पर तुरंत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखें।

उन्होंने बताया कि संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल 22 से 25 जनवरी के बीच कलमा से सुखसोधा तक नदी किनारे का सर्वे करेगा और जुटाए गए आंकड़े सरकार को सौंपेगा।


संवाद की पहल के बावजूद, Mahanadi Water Dispute एक बार फिर नाजुक मोड़ पर खड़ा है। यदि समय रहते दोनों राज्य पारदर्शिता और सहयोग से आगे नहीं बढ़े, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
महानदी केवल नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है — और इसकी रक्षा सभी की जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *