मुंगेली में जिंदा महिलाओं को ‘मृत’ घोषित कर दिया: लोरमी में सरकारी रिकॉर्ड की बड़ी चूक से बुजुर्ग भूख के कगार पर

Alive women declared dead in Mungeli: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यहां दो जिंदा बुजुर्ग महिलाओं को ऑनलाइन सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जिसके कारण वे पिछले चार महीनों से राशन और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं।

यह मामला सीधे-सीधे “Alive women declared dead in Mungeli” जैसी भयावह सच्चाई को सामने लाता है।


🌾 राशन के लिए दर-दर भटकती सहबीन बैगा

खुड़िया वन क्षेत्र के पथर्री गांव की 70 वर्षीय बैगा आदिवासी महिला सहबीन बैगा आज भी जिंदा हैं, लेकिन सरकारी पोर्टल में उन्हें मृत दिखा दिया गया।

इसके कारण उनका नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया और पिछले तीन से चार महीनों से उन्हें चावल तक नहीं मिल रहा।

कभी जंगल की लकड़ी बीनने वाली सहबीन आज पेट भरने के लिए भीख मांगने को मजबूर हो गईं।

सरपंच, सचिव और राशन दुकानदार को कई बार जानकारी देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। मीडिया में मामला आने के बाद कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर के हस्तक्षेप से प्रशासन ने आनन-फानन में उन्हें दो बोरी चावल और नमक उपलब्ध कराया।


👵 बंधवा गांव की दूसरी “मृत घोषित” महिला

इसी तरह लोरमी विधानसभा क्षेत्र के बंधवा गांव में एक और बुजुर्ग महिला को भी जिंदा होते हुए मृत दिखा दिया गया है।

इस गलती के कारण:

  • उनका राशन बंद हो गया
  • वृद्धा पेंशन भी रोक दी गई

ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण ये महिलाएं काम भी नहीं कर पा रहीं, जिससे उनका जीवन और भी कठिन हो गया है।

यह भी साफ करता है कि Alive women declared dead in Mungeli केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन पर सीधा हमला है।


👩‍👧 बेटियों को भी नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

सहबीन बैगा की दो बेटियां हैं। इनमें से एक विधवा है, लेकिन:

  • उसे विधवा पेंशन नहीं मिल रही
  • दोनों बेटियों को महतारी वंदन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा

यह स्थिति सरकार के आदिवासी और गरीब कल्याण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


🛑 प्रशासन का आश्वासन

मामला सामने आने के बाद लोरमी एसडीएम ने जांच कर आवश्यक सुधार और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवारों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तुरंत ऑनलाइन रिकॉर्ड में सुधार और योजनाओं की बहाली जरूरी है।


मुंगेली के लोरमी ब्लॉक की यह घटना दिखाती है कि जब कागजों में इंसान को “मृत” बना दिया जाता है, तो असल जिंदगी में उसकी रोटी, दवा और सम्मान भी छिन जाता है।

Alive women declared dead in Mungeli सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम की एक खतरनाक चूक है, जिसे तुरंत सुधारना जरूरी है।

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