बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान हुआ एक छोटा-सा संवाद अब बड़े विवाद में बदल गया है। Guru Ghasidas University Vice Chancellor controversy ने पूरे देश के साहित्यिक और बौद्धिक जगत को झकझोर कर रख दिया है।
यह घटना ‘समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ’ विषय पर आयोजित सेमिनार के दौरान हुई, जहां विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आलोक कुमार चक्रवाल मंच से बोल रहे थे।
🎤 कैसे शुरू हुआ विवाद?
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने सामने बैठे लेखक मनोज रुपड़ा से हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा –
“भाई साहब, आप बोर तो नहीं हो रहे?”
मनोज रुपड़ा ने जवाब दिया कि कुलपति को विषय पर बोलना चाहिए। इसी बात पर कुलपति नाराज हो गए और सार्वजनिक मंच से लेखक को अपमानित करते हुए कहा –
“तुम्हें नहीं पता कुलपति से कैसे बात करते हैं, इन्हें दोबारा मत बुलाना!”
इसके बाद उन्होंने लेखक को सभागार छोड़ने को कहा। यह दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
✍️ लेखक मनोज रुपड़ा ने क्या कहा?
मनोज रुपड़ा ने प्रतिक्रिया में कहा –
“यह मेरा व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे साहित्य समाज का अपमान है। यह उस सोच के खिलाफ विरोध है, जो कला और साहित्य को तुच्छ समझती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति से दुश्मनी नहीं, बल्कि सम्मान की रक्षा है।
📚 साहित्य जगत में उबाल
इस घटना के बाद साहित्य अकादमी, जन संस्कृति मंच और कई लेखक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई।
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि अब विश्वविद्यालय को भविष्य में अकादमी से कोई कार्यक्रम या फंड नहीं मिलेगा।
रायपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और बिलासपुर सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए।
🏛️ भूपेश बघेल की तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X (Twitter) पर लिखा कि यह घटना
“कुलपति पद पर एक धब्बा है”
और उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
उन्होंने कहा कि समाज शिक्षकों के आचरण से सीखता है, लेकिन इस घटना ने समाज को शर्मसार किया है।
Guru Ghasidas University Vice Chancellor controversy अब सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं रह गया है। यह सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बौद्धिक गरिमा की लड़ाई बन चुका है।
साहित्यकारों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटना की निष्पक्ष जांच करे और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में संवाद और सम्मान की संस्कृति बनी रहे।
