छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना बताए गए निगेटिव ACR भी जबरन रिटायरमेंट का आधार बन सकते हैं

uncommunicated ACR compulsory retirement: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक बेहद अहम मामले में स्पष्ट कर दिया है कि बिना बताए गए (Uncommunicated) निगेटिव ACR भी जबरन सेवानिवृत्ति का आधार बन सकते हैं।
यह फैसला Chief Justice रमेश सिन्हा और Justice बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने सुनाया है।

यह निर्णय हजारों सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय करता है।


📌 मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता वर्ष 1995 में जगदलपुर जिला न्यायालय में प्रोसेस राइटर के रूप में नियुक्त हुआ था।
बाद में उसे पदोन्नति देकर 2018 में बीजापुर में सहायक ग्रेड-II के पद पर पदस्थ किया गया।

उसी वर्ष एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई, जिसने 50 वर्ष की आयु या 20 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा की।
इस जांच के बाद अगस्त 2018 में उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी गई।


⚖️ कर्मचारी ने क्या आपत्ति उठाई?

कर्मचारी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि—

  • उसके खिलाफ निगेटिव ACR उसे कभी बताए नहीं गए
  • कुछ रिपोर्ट्स सामूहिक और अस्पष्ट थीं
  • 2016 में उसकी ईमानदारी पर संदेह वाला रिकॉर्ड उसे कभी सूचित नहीं किया गया

उसका कहना था कि बिना मौका दिए ऐसे रिकॉर्ड के आधार पर Compulsory Retirement अन्यायपूर्ण है।


🏛️ हाईकोर्ट ने क्या कहा?

खंडपीठ ने पाया कि—

  • 2010 के बाद कर्मचारी की कार्यशैली, व्यवहार और ईमानदारी लगातार गिरती गई
  • मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की विशेष रिपोर्ट में उसे लापरवाह और आदेशों की अनदेखी करने वाला बताया गया
  • उसकी 2011, 2014 और 2016 की ACR रिपोर्ट्स में गंभीर प्रतिकूल टिप्पणियां थीं

कोर्ट ने कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी ने पूरे सेवा रिकॉर्ड को देखकर फैसला लिया था।


📜 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दो अहम मामलों का हवाला दिया—
Harijan & Tribal Welfare Deptt v. Nityananda Pati
State of Gujarat v. Umedbhai Patel

इन फैसलों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि
👉 Uncommunicated ACR compulsory retirement का आधार बन सकता है।


🔍 क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला स्पष्ट करता है कि
सरकारी कर्मचारी सिर्फ अच्छे सालों के आधार पर सुरक्षा नहीं मांग सकते।
अगर लगातार गिरावट और संदेह का रिकॉर्ड है, तो भले ही वह पहले न बताया गया हो, फिर भी प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।


⚖️ निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए
उसकी Compulsory Retirement को पूरी तरह सही ठहराया।

यह फैसला देशभर के सेवा कानून से जुड़े मामलों में एक नया मानक तय करता है।

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