दुर्ग स्कूल नेशनल कबड्डी में ओवरएज विवाद, राजस्थान टीम लौट गई, SGFI जांच पर सवाल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आयोजित स्कूल नेशनल अंडर-14 कबड्डी प्रतियोगिता अब खेल से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में है।
राजस्थान की टीम ने Kabaddi Under 14 Controversy के बाद प्रतियोगिता छोड़ दी और क्लोजिंग सेरेमनी में शामिल हुए बिना ही रात में रवाना हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने खेल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


🏏 ओवरएज खिलाड़ियों का आरोप

राजस्थान टीम ने आरोप लगाया है कि
छत्तीसगढ़ की टीम में 14 साल की जगह 21 साल तक के खिलाड़ी खेले गए।

टीम ने लिखित प्रोटेस्ट दर्ज कराते हुए खिलाड़ियों के
👉 आधार कार्ड
👉 पहचान पत्र
👉 जन्मतिथि
की जांच की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई दस्तावेज नहीं दिखाया।

राजस्थान टीम के अनुसार,
एक खिलाड़ी की जन्मतिथि 2002 निकली, जो पहले हरियाणा फेडरेशन कप भी खेल चुका था।


📄 शिकायत की रिसिविंग तक नहीं मिली

राजस्थान कबड्डी टीम के जनरल मैनेजर ने बताया कि उन्होंने
SGFI प्लेटफॉर्म पर शिकायत दी,
पैसे भी जमा करवाए गए,
लेकिन रिसिविंग तक नहीं दी गई।

यही नहीं, आरोप है कि छत्तीसगढ़ के कुछ ऑफिशियल्स ने उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया।


📱 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

इस Kabaddi Under 14 Controversy के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।
कुछ वीडियो में साफ लिखा है –
“छत्तीसगढ़ की टीम ने फ्रॉड कर मैच जीता।”

राजस्थान के अधिकारियों का कहना है कि
मैच के दौरान भी ऑफिशियल्स ने गलत फैसले दिए।


🏆 छत्तीसगढ़ ने जीता खिताब

6 से 9 जनवरी तक चले टूर्नामेंट में
छत्तीसगढ़ की टीम को विजेता घोषित किया गया।
लेकिन विवाद के बाद इस जीत की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।


🏛️ SGFI और कमेटी पर सवाल

इस मामले की जिम्मेदारी SGFI ऑब्जर्वर और दुर्ग संभाग संयोजक की थी।
ऑब्जर्वर ने कहा कि शिकायत चेयरमैन कल्पना स्वामी को मिली है और वही निर्णय लेंगी।

वहीं चेयरमैन कल्पना स्वामी ने कहा कि
“राजस्थान की टीम को जाना नहीं चाहिए था।
वे खुद ही क्लोजिंग से पहले चले गए।”

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि
उन्हें कमेटी के निर्णय की पूरी जानकारी अभी नहीं है।


⚖️ खेल से ज्यादा सिस्टम पर सवाल

Kabaddi Under 14 Controversy अब सिर्फ दो टीमों का मामला नहीं रहा।
यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता,
खिलाड़ियों की उम्र सत्यापन प्रक्रिया
और SGFI की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या SGFI निष्पक्ष जांच करेगा या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।

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