विषाखा गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में गठित ICC, अब तक तीन यौन उत्पीड़न शिकायतों की हुई जांच

Chhattisgarh High Court ICC: देशभर में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट से यह रिपोर्ट मांगी है कि विषाखा गाइडलाइंस और POSH एक्ट 2013 के तहत यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था है।
इसी क्रम में Chhattisgarh High Court ICC को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में गठित है ICC

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके यहां आंतरिक शिकायत समिति (ICC) पूरी तरह से गठित और सक्रिय है। यह समिति महिला कार्यस्थल यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत काम कर रही है।
ICC की सदस्य-सचिव और नोडल अधिकारी निधि शर्मा तिवारी ने बताया कि अब तक तीन शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन सबूतों के अभाव में सभी को खारिज किया गया।


2025 में हुआ ICC का पुनर्गठन

निधि शर्मा तिवारी ने कहा कि 19 मई 2025 को Chhattisgarh High Court ICC का पुनर्गठन किया गया था। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जारी हुआ, ताकि महिलाओं की शिकायतों पर प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई हो सके।

इस समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रजनी दुबे हैं। अन्य सदस्यों में वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अकादमी के अधिकारी और हाईकोर्ट प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं।


सुप्रीम कोर्ट क्यों सख्त हुआ?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर जनहित याचिका में कहा गया कि कई राज्यों में अब भी विषाखा गाइडलाइंस पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। इसी वजह से अदालत ने सभी हाईकोर्ट से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
इस पर Chhattisgarh High Court ICC की ओर से कहा गया कि यहां कानून के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।


महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की ओर कदम

हालांकि अब तक कोई शिकायत साबित नहीं हुई है, फिर भी Chhattisgarh High Court ICC की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि यदि कोई महिला न्यायालय परिसर में असुरक्षित महसूस करती है, तो उसके पास शिकायत का मजबूत मंच मौजूद है।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह POSH एक्ट और विषाखा गाइडलाइंस के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहा है। Chhattisgarh High Court ICC अब महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में एक अहम ढाल बन चुका है।

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