बालोद आयोजन स्थगन को लेकर बृजमोहन अग्रवाल और विभाग आमने-सामने

बालोद।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 9 से 13 जनवरी तक प्रस्तावित National Rover Ranger Jamboree Balod अब विवादों के घेरे में आ गया है। टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद राजनीति और प्रशासन के बीच तकरार खुलकर सामने आ गई है।

जहां एक ओर छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड्स परिषद के अध्यक्ष और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी को स्थगित करने की घोषणा कर दी, वहीं दूसरी ओर विभागीय अफसरों और राज्य की चीफ कमिश्नर ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।


🟦 स्थगन की घोषणा और तुरंत पलटवार

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद परिषद की बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता बृजमोहन अग्रवाल ने की। बैठक के बाद परिषद की ओर से कहा गया कि—

  • जंबूरी आयोजन को स्थगित किया जाता है
  • आयोजन स्थल को बिना परिषद की सहमति बदला गया
  • इससे स्काउट गाइड्स के संविधान और नियमों का उल्लंघन हुआ है

हालांकि, इसके तुरंत बाद स्काउट एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ राज्य की चीफ कमिश्नर ने बयान जारी कर कहा कि—

“जंबूरी को स्थगित करने की खबरें भ्रामक हैं। आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार होगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि
👉 5 हजार से अधिक रोवर-रेंजर पहले ही बालोद पहुंच चुके हैं,
👉 और तैयारियां अंतिम चरण में हैं।


🟨 कैसे शुरू हुआ National Rover Ranger Jamboree विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी है।

कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल ने—

  • EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) में शिकायत दर्ज कराई
  • आरोप लगाया कि टेंडर खुलने से पहले ही ठेकेदार को काम दे दिया गया
  • दस्तावेजों के साथ वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई

यहीं से National Rover Ranger Jamboree Balod को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया।


🟧 बृजमोहन अग्रवाल के गंभीर आरोप

बृजमोहन अग्रवाल के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि—

  • जंबूरी का आयोजन नवा रायपुर में प्रस्तावित था
  • स्कूल शिक्षा विभाग ने परिषद की सहमति के बिना आयोजन स्थल बदलकर बालोद कर दिया
  • आयोजन के लिए स्वीकृत 10 करोड़ रुपये सीधे DEO के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए

उनका कहना है कि यह प्रक्रिया
👉 नियमों के खिलाफ
👉 और संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।


⚖️ अपनी ही सरकार में खुली खींचतान

इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
एक ही सरकार में—

  • सांसद और परिषद अध्यक्ष एक ओर
  • विभागीय अफसर और राज्य नेतृत्व दूसरी ओर

अब सवाल यह है कि—
👉 क्या जंबूरी तय समय पर होगी?
👉 क्या टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होगी?
👉 और क्या यह विवाद युवाओं के राष्ट्रीय आयोजन पर असर डालेगा?


National Rover Ranger Jamboree Balod अब केवल एक युवा आयोजन नहीं, बल्कि
👉 प्रशासनिक पारदर्शिता,
👉 राजनीतिक टकराव,
👉 और वित्तीय जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

प्रदेशभर की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि आगे सरकार और विभाग क्या रुख अपनाते हैं

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