कवर्धा में 7 करोड़ का धान गायब, अफसर बोले—चूहे-दीमक खा गए; फर्जी बिल और CCTV छेड़छाड़ से उठे गंभीर सवाल

कवर्धा।
Kawardha Paddy Scam: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के भंडारण को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब बताया जा रहा है। लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि अधिकारी इस कमी का कारण चूहे, दीमक और कीड़ों को बता रहे हैं।

यह मामला अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि Kawardha Paddy Scam के रूप में चर्चा में आ गया है।


📦 कहां और कितना धान हुआ गायब?

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला बाज़ार चारभाठा और बघर्रा धान संग्रहण केंद्रों से जुड़ा है।

वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए कुल 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से
👉 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई।

  • बाज़ार चारभाठा केंद्र से ही लगभग 22 हजार क्विंटल धान गायब मिला
  • जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है

🐭 अफसरों का तर्क: चूहे-दीमक खा गए धान

जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि—

“धान की कमी मौसम के प्रभाव और चूहे, दीमक व कीड़ों से हुए नुकसान के कारण है। पूरे प्रदेश के 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में कवर्धा की स्थिति बेहतर है।”

यानी, एक तरफ हजारों क्विंटल धान चूहों ने खा लिया, और दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि अन्य जिलों की हालत और खराब है, इसलिए ज्यादा चिंता की बात नहीं।


🧾 फर्जी बिल और CCTV से छेड़छाड़ के आरोप

लेकिन यहीं से कहानी में गंभीर मोड़ आता है।

बाज़ार चारभाठा संग्रहण केंद्र के प्रभारी पर—

  • डैमेज धान खरीदी के फर्जी बिल
  • मजदूरों की फर्जी हाजिरी
  • आवक-जावक में फर्जी एंट्री
  • CCTV कैमरों से छेड़छाड़

जैसे गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में शिकायतें सही पाई गईं, जिसके बाद संबंधित प्रभारी को हटा दिया गया


❓ बड़े सवाल जो अब भी अनुत्तरित

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  • अगर धान चूहे-दीमक ने खाया, तो फर्जी बिल किसने बनाए?
  • फर्जी एंट्री और हाजिरी क्यों लगाई गई?
  • CCTV कैमरों से छेड़छाड़ की जरूरत क्यों पड़ी?
  • और अगर सब कुछ प्राकृतिक नुकसान था, तो कर्मचारी को हटाया क्यों गया?

⚖️ नियम क्या कहते हैं?

विभागीय निर्देशों के अनुसार—

  • यदि 2% से अधिक धान की कमी पाई जाती है
    👉 तो पहले निलंबन,
    👉 फिर जांच,
    👉 और उसके बाद एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

लेकिन इस मामले में अब तक कार्रवाई को लेकर स्पष्टता नहीं दिख रही।


कवर्धा का यह मामला सिर्फ धान की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
Kawardha Paddy Scam अब प्रदेश की धान संग्रहण व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है।

अब देखना होगा कि—
👉 क्या मामले में निष्पक्ष जांच होगी?
👉 या फिर चूहे-दीमक ही 7 करोड़ के धान का जिम्मा लेते रहेंगे?

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