मटर तोड़ने पर दो मासूम बच्चों को बांधकर पीटा, बलरामपुर में आरोपी गिरफ्तार

बलरामपुर (छत्तीसगढ़)।
Balrampur Child Assault Case: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। खेत से मटर तोड़कर खाने के आरोप में एक व्यक्ति ने दो नाबालिग बच्चों को रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीट दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला Balrampur Child Assault Case के नाम से चर्चा में है।


📍 क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार यह घटना 4 जनवरी को राजपुर थाना क्षेत्र के लाडुआ गांव में हुई।
आरोपी की पहचान कपिल ओरांव (26) के रूप में हुई है, जो पीड़ित बच्चों का पड़ोसी और रिश्तेदार बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता कृष्णनाथ टोप्पो (40) ने बताया कि उनका 7 वर्षीय बेटा और एक अन्य नाबालिग रिश्तेदार आरोपी के खेत में उगी मटर खा रहे थे। इसी बात से नाराज होकर कपिल ओरांव ने दोनों बच्चों को जबरन अपने घर घसीट ले गया।


😢 बच्चों के साथ अमानवीय बर्ताव

शिकायत के मुताबिक—

  • आरोपी ने पहले बच्चों को गालियां दीं
  • फिर घूंसे और लातों से बेरहमी से पिटाई की
  • इसके बाद हाथ-पैर रस्सी से बांधकर जमीन पर पटक दिया

यह दृश्य देखकर गांव में दहशत फैल गई।


📱 वायरल वीडियो बना सबूत

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो मासूम बच्चे जमीन पर पड़े हैं और उनके हाथ-पैर बंधे हुए हैं
वीडियो में एक आवाज बच्चों से मटर तोड़ने के बारे में पूछती सुनाई देती है, जिस पर एक बच्चा डरते हुए कहता है—
“मुझे नहीं पता।”


⚖️ पुलिस की कार्रवाई

राजपुर थाना पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं—

  • 137(2)
  • 296
  • 351(2)
  • 115(2)
  • 127(2)
  • 140(3)

के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की आगे जांच जारी है


🧒 सवालों के घेरे में समाज

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि
क्या छोटी-सी गलती पर बच्चों के साथ इस तरह की क्रूरता जायज़ है?
Balrampur Child Assault Case ने समाज और प्रशासन—दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।


मटर तोड़ने जैसी मामूली बात पर बच्चों के साथ की गई यह बर्बरता
साफ संदेश देती है कि बच्चों के अधिकार और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता
कानून ने इस बार तेजी दिखाई है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है

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