अबूझमाड़ का पहली बार होगा मानचित्रण: IIT-रुड़की के साथ समझौता, 2030 तक पूरे क्षेत्र को मिलेगा विकास का रास्ता

अबूझमाड़ में विकास की नई शुरुआत

Abujhmad mapping project: छत्तीसगढ़ के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे अबूझमाड़ क्षेत्र का अब पहली बार वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस उद्देश्य से IIT-रुड़की के साथ एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह क्षेत्र 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला हुआ है और घने जंगलों व नक्सली गतिविधियों के कारण अब तक आधिकारिक नक्शों से बाहर रहा।


2030 तक पूरा होने की संभावना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि अबूझमाड़ का मानचित्रण कार्य 2030 तक पूरा होने की संभावना है। हालांकि सरकार का प्रयास है कि यह काम तय समय से पहले पूरा कर लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद अब इस क्षेत्र में सर्वेक्षण और प्रशासनिक पहुंच संभव हो पाई है।


अब सर्वेक्षण, फिर सड़क, स्कूल और अस्पताल

मुख्यमंत्री साय के अनुसार,

“अबूझमाड़ में न सड़कें थीं, न गांवों का सर्वे। अब सर्वेक्षण के बाद वहां प्रशासनिक सुविधाएं, विकास योजनाएं और आधारभूत ढांचा पहुंचेगा।”

सरकार का मानना है कि केवल नक्सलवाद का खात्मा ही पर्याप्त नहीं, बल्कि नक्सल-मुक्त क्षेत्रों में तेज विकास भी उतना ही जरूरी है।


सुरक्षा बलों की मौजूदगी से बदली तस्वीर

राज्य में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। पहले इन शिविरों का दायरा 5 किलोमीटर था, जिसे बढ़ाकर अब 10 किलोमीटर कर दिया गया है।

इस रणनीति के तहत अब तक करीब 400 गांवों की स्थापना हो चुकी है, जिससे नक्सली पीछे हटने को मजबूर हुए हैं।


पूर्व सरकार पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आरोप लगाया कि राज्य की पूर्व कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से एक समय में लगभग 75 प्रतिशत नक्सली छत्तीसगढ़ में सक्रिय थे।


अबूझमाड़ मैपिंग से बदलेगी किस्मत

विशेषज्ञों के अनुसार, Abujhmad mapping project पूरा होने के बाद इस क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन अधिकार और पर्यटन जैसी योजनाओं का रास्ता खुलेगा।
यह पहल न केवल प्रशासन को मजबूत करेगी, बल्कि आदिवासी समुदायों को भी मुख्यधारा से जोड़ेगी।


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