भोपाल / इंदौर:
Indore Water Contamination: मध्य प्रदेश के इंदौर में Bhagirathpura इलाके में फैला जल संकट अब एक नए और बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।
अब तक दूषित पेयजल के सेवन से 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। कई मरीज अभी भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
अब इस त्रासदी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
🧠 GBS का संदिग्ध मामला, खतरे की नई घंटी
67 वर्षीय पार्वती बाई कोंडला, जो भगीरथपुरा की निवासी हैं, में Guillain-Barre Syndrome (GBS) के लक्षण पाए गए हैं।
GBS एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद की नसों पर हमला करने लगती है।
फिलहाल पार्वती बाई वेंटिलेटर पर हैं, उन्हें किडनी फेल्योर के चलते डायलिसिस दिया जा रहा है और उनकी नर्वस सिस्टम तेजी से कमजोर हो रही है।
🏥 कैसे बिगड़ी हालत
पार्वती बाई 27 दिसंबर की रात अचानक उल्टी और दस्त से पीड़ित हुईं।
अगले दिन उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
उनके हाथ-पैरों में कमजोरी आई, रिफ्लेक्स खत्म होने लगे और वे खुद से सांस भी नहीं ले पा रही थीं।
2 जनवरी को उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल, इंदौर रेफर किया गया।
🔬 मेडिकल जांच में क्या सामने आया
इंदौर के Alpha Brain Study Centre में की गई Nerve Conduction Study (NCS) में
- नसों की गंभीर चोट
- पैरों की सेंसरी नसों में सिग्नल गायब
- एक्यूट इंफ्लेमेटरी नर्व डैमेज
जैसे स्पष्ट संकेत मिले हैं।
AIIMS के एक वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक,
“यह उम्र से जुड़ी समस्या नहीं है। यह एक तीव्र प्रक्रिया है, जो संक्रमण या विषैले तत्वों से ट्रिगर होती है। पानी के दूषित होने के संदर्भ में यह बेहद चिंताजनक है।”
💉 महंगा इलाज, गरीब परिवारों पर बोझ
GBS के इलाज में IVIG इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिनकी कीमत करीब 30 हजार रुपये प्रति डोज होती है।
अक्सर मरीज को 5 से 10 डोज की जरूरत पड़ती है।
कुल खर्च 10 से 15 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जो पहले से संकट में फंसे परिवारों के लिए विनाशकारी है।
🏛️ प्रशासन का इनकार, डॉक्टरों की चेतावनी
इंदौर के CMHO डॉ. माधव हसनानी ने फिलहाल जल संकट और GBS के बीच सीधे संबंध से इनकार किया है।
वहीं पार्वती के इलाज कर रहे डॉक्टर राहुल करोडे ने पुष्टि की कि
“NCS रिपोर्ट GBS के अनुरूप है और प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई है।”
🚨 विशेषज्ञों का आरोप: सिस्टम फेल हो चुका है
जन स्वास्थ्य अभियान (JSAI) से जुड़े विशेषज्ञ अमूल्य निधि का कहना है कि
यह संकट अब केवल शारीरिक बीमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानसिक और सिस्टम स्तर की विफलता बन चुका है।
उन्होंने 2019 की CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि
भोपाल और इंदौर में हर साल लाखों जलजनित बीमारियों के मामले सामने आते हैं, लेकिन निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है।
💧 ADB की शर्तें और सवाल
मध्य प्रदेश सरकार ने जल प्रबंधन के लिए ADB से 200 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया था।
इसमें हर 15 दिन में वॉटर ऑडिट और क्वालिटी टेस्टिंग अनिवार्य थी।
सवाल यह है कि
👉 क्या इन शर्तों का पालन हुआ?
👉 टैंकर, बोरवेल और असुरक्षित स्रोतों के पानी की जांच क्यों नहीं हो रही?
निष्कर्ष
Indore Water Contamination अब सिर्फ एक स्थानीय स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गई है।
यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिसमें जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की सख्त जरूरत है।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं।
