Venezuela crude oil impact on India: वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति के साथ-साथ कच्चे तेल के बाजार में भी हलचल तेज हो गई है।
तेल-समृद्ध इस देश में अमेरिकी कार्रवाई के बाद निवेशकों और आयातक देशों की नजरें अब तेल आपूर्ति और कीमतों पर टिक गई हैं।
भारत, जो अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इस घटनाक्रम से अछूता नहीं है। हालांकि स्थिति उतनी भयावह भी नहीं है, जितनी पहली नजर में लगती है।
⛽ कच्चे तेल की आपूर्ति पर संभावित खतरा
बाजार संकेत दे रहे हैं कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में गैप-अप ओपनिंग हो सकती है।
यदि वेनेजुएला के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो ब्रेंट क्रूड 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर दबाव में आ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह असर तुरंत और स्थायी नहीं होगा।
🛢️ भारत की “हेवी क्रूड” पर निर्भरता
भारत की कई जटिल रिफाइनरियां, खासकर जामनगर रिफाइनरी,
वेनेजुएला के भारी (Heavy) और सघन कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं।
अगर वेनेजुएला से आपूर्ति पूरी तरह रुकती है, तो भारतीय रिफाइनरों को
मध्य-पूर्व से महंगे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है।
💰 आयात बिल पर क्या पड़ेगा असर?
वर्ष 2024 में भारत ने वेनेजुएला से करीब 1.76 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था।
ऐसे में अगर वैश्विक कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका सीधा असर
भारत के तेल आयात बिल और खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर
दो हफ्तों के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दिखने लगता है।
🇷🇺 रूस से तेल आयात बना भारत की ढाल
हालांकि भारत के पास एक मजबूत सुरक्षा कवच भी है।
2025 के अंत तक रियायती रूसी कच्चा तेल, भारत के कुल आयात का
करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बन चुका था।
यह रणनीतिक बदलाव भारत को
वेनेजुएला जैसे झटकों से काफी हद तक सुरक्षित बनाता है,
जो एक दशक पहले संभव नहीं था।
🌍 वैश्विक तेल सरप्लस से राहत
फिलहाल दुनिया में कच्चे तेल की भारी अतिरिक्त उपलब्धता है।
करीब 1.3 अरब बैरल तेल समुद्र में जहाजों पर संग्रहित है।
यही कारण है कि यदि वेनेजुएला की आपूर्ति अचानक बाधित भी होती है,
तो तुरंत कीमतों में तेज उछाल की आशंका कम मानी जा रही है।
⏱️ भारत में खुदरा कीमतों पर देर से असर
भारत की तेल विपणन कंपनियां
कच्चे तेल की औसत लागत को 15 दिन के चक्र में आंकती हैं।
इसलिए भले ही आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ें,
भारतीय उपभोक्ता को
तुरंत पेट्रोल-डीजल महंगा होने का झटका नहीं लगेगा।
🔮 लंबी अवधि में राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक हालात स्थिर होते हैं,
तो वेनेजुएला भविष्य में
20 लाख बैरल प्रतिदिन तक उत्पादन बढ़ा सकता है।
लंबी अवधि में इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी
और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को
ऊर्जा कीमतों में राहत मिल सकती है।
Venezuela crude oil impact on India फिलहाल
चिंता का विषय जरूर है, लेकिन
रूसी तेल, वैश्विक सरप्लस और कीमत निर्धारण प्रणाली के कारण
भारत की स्थिति काफी संतुलित बनी हुई है।
फिर भी, बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच
तेल कंपनियां और सरकार
करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं।
