शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, बेटे के जन्मदिन पर जेल से रिहा

Chaitanya Baghel bail: रायपुर में शनिवार को एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से अहम दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में उन्हें जमानत दे दी।

यह रिहाई कई मायनों में खास रही, क्योंकि चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी 18 जुलाई 2025 को उनके जन्मदिन पर हुई थी, और अब उनकी रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन पर हुई।


⚖️ अदालत की टिप्पणी: भूमिका सीमित, सबूत कमजोर

हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB/EOW की ओर से दर्ज मामलों की सुनवाई के दौरान कहा कि—

  • चैतन्य बघेल की भूमिका अन्य आरोपियों की तुलना में काफी सीमित है
  • उनके खिलाफ कोई ठोस दस्तावेजी या वित्तीय सबूत पेश नहीं किए गए
  • आरोप मुख्य रूप से बयानों पर आधारित हैं, न कि प्रत्यक्ष साक्ष्यों पर

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में जिन अन्य प्रमुख आरोपियों—
अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लन—को पहले ही जमानत मिल चुकी है, वे सभी कथित तौर पर ज्यादा प्रभावशाली भूमिका में थे।


🎉 जेल के बाहर भावुक दृश्य, कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा

रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा रही।
भूपेश बघेल स्वयं अपने बेटे को लेने पहुंचे। चैतन्य ने बाहर आते ही पिता के चरण छुए, गले मिले और फिर समर्थकों के बीच निकल पड़े।

ढोल-नगाड़ों, नारों और झंडों के बीच चैतन्य बघेल ने एसयूवी की सनरूफ से कांग्रेस का झंडा लहराकर समर्थकों का अभिवादन किया। यह दृश्य पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।


🗣️ चैतन्य बघेल का पहला बयान

रिहाई के बाद चैतन्य बघेल ने कहा—

“न्याय में देरी हुई, लेकिन आखिरकार न्याय मिला। मुझे हमारे संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”

उन्होंने मामले पर विस्तार से बोलने से इनकार किया और इसे न्यायालय में लंबित बताया।


🏛️ भूपेश बघेल का आरोप: विपक्ष को निशाना बना रही एजेंसियां

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस जमानत को
“सरकारी साजिशों पर जीत” बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि—

  • ED, CBI, IT और DRI जैसी एजेंसियों का
  • देशभर में विपक्षी नेताओं को डराने और बदनाम करने के लिए
  • राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है

उनका कहना था कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।


📌 शराब घोटाले का आरोप क्या है?

जांच एजेंसियों के अनुसार—

  • 2019 से 2022 के बीच
  • कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में
  • राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ

ED का दावा है कि चैतन्य बघेल ने
करीब 1000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को संभाला,
जबकि ACB/EOW ने 200–250 करोड़ रुपये की रकम का आरोप लगाया है।

हालांकि, अदालत ने फिलहाल इन दावों को ठोस साक्ष्यों से रहित माना है।


Chaitanya Baghel liquor scam bail ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को फिर से गर्मा दिया है।
जहां कांग्रेस इसे न्याय की जीत बता रही है, वहीं सत्ताधारी पक्ष जांच जारी रखने की बात कर रहा है।

अब यह मामला आगे किस मोड़ पर जाएगा, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *