नई दिल्ली।
देश की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनियों में शामिल नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) अब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े विस्तार की ओर बढ़ रही है। NTPC nuclear power plants को लेकर गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ भूमि और पानी की उपलब्धता पर बातचीत अंतिम चरण में है।
गुजरात को सैद्धांतिक मंजूरी, आंध्र प्रदेश जल्द देगा हरी झंडी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, गुजरात सरकार ने पहले ही NTPC को सैद्धांतिक स्वीकृति (in-principle approval) दे दी है। वहीं, आंध्र प्रदेश में जमीन चिन्हित की जा चुकी है और वहां जल्द ही औपचारिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “आंध्र प्रदेश तटीय राज्य है, इसलिए परमाणु संयंत्र के लिए पानी की उपलब्धता कोई बड़ी चुनौती नहीं होगी।”
2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसमें से 30 GW क्षमता NTPC अपने परमाणु उपक्रमों के जरिए विकसित करना चाहती है।
यह क्षमता NTPC Parmanu Urja Nigam Limited (NPUNL) और ASHVINI, जो कि NTPC और NPCIL का संयुक्त उपक्रम है, के माध्यम से हासिल की जाएगी।
राजस्थान के बाद अब नए राज्यों पर नजर
NTPC पहले ही राजस्थान के माही बांसवाड़ा में 2,800 मेगावॉट क्षमता वाले परमाणु बिजली संयंत्र की शुरुआत कर चुकी है।
सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इस संयंत्र में 700-700 मेगावॉट के चार स्वदेशी प्रेसराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर लगाए जाएंगे।
देशभर में 35-36 संभावित साइट्स की तलाश
NTPC सिर्फ चार राज्यों तक सीमित नहीं है। कंपनी देशभर में 35 से 36 संभावित स्थलों की पहचान कर रही है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी संभावित स्थानों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जहां बातचीत जारी है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि NTPC nuclear power plants भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।
यह कदम न सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्थायी ऊर्जा समाधान भी सुनिश्चित करेगा।
NTPC का यह परमाणु विस्तार भारत के ऊर्जा भविष्य की तस्वीर बदल सकता है।
2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम, राज्यों के सहयोग और स्वदेशी तकनीक के साथ, परमाणु ऊर्जा भारत की रीढ़ बनने की ओर अग्रसर है।
