Indore Contaminated Water Case: देश में कई बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हो चुका इंदौर आज गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया के मामलों ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
Indore Contaminated Water Case में अब तक 10 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।
🏛️ सरकार की सख्त कार्रवाई, नगर आयुक्त हटाए गए
मध्य प्रदेश सरकार ने इस त्रासदी को गंभीरता से लेते हुए इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया है।
इसके साथ ही—
- अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को निलंबित
- जल वितरण विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता प्रदीप निगम को हटाया गया
यह अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।
⚖️ हाईकोर्ट में अलग-अलग आंकड़े
राज्य सरकार द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में चार मौतों की पुष्टि की गई है।
हालांकि, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने साफ कहा—
“स्वास्थ्य विभाग चार मौतें बता रहा है, लेकिन मेरे पास 10 मौतों की जानकारी है।”
यही विरोधाभास इस मामले को और गंभीर बना रहा है।
🏥 अस्पतालों में हालात चिंताजनक
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार—
- 294 मरीज भर्ती
- 93 मरीज डिस्चार्ज
- 201 मरीज अब भी अस्पताल में
- 32 मरीज ICU में भर्ती
डायरिया, उल्टी और निर्जलीकरण के गंभीर मामले सामने आए हैं।
🕯️ एक घर की कहानी, पूरे शहर का दर्द
68 वर्षीय गीताबाई ध्रुवकर की मौत ने भगीरथपुरा को शोक में डुबो दिया।
उनके देवर चंद्रशेखर ध्रुवकर कहते हैं—
“उल्टी-दस्त के बाद किडनी फेल हो गई… सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।”
यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
🚰 नगर निगम की अपील: नल का पानी न पिएं
स्थिति को संभालने के लिए—
- गलियों में टैंकर से पानी सप्लाई
- नलों को फ्लश कर पानी की जांच
- लीकेज बंद किए गए
- माइक से अनाउंसमेंट: नल का पानी न पीएं
- लोगों से पानी उबालकर पीने की अपील
ASHA कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं।
🗣️ मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा—
“दूषित पानी मामले में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई तय है। लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं होगा।”
Indore Contaminated Water Case ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वच्छता रैंकिंग के पीछे बुनियादी सेवाओं की निगरानी कितनी जरूरी है। अब जनता की नजर इस पर है कि दोषियों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय और सुरक्षा मिले।
