Indore Water Contamination: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सामने आए भीषण जल संकट ने प्रशासन और सरकार दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 150 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं।
अब इस मामले की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि पीने के पानी के नमूनों में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो सामान्यतः सीवर के पानी में मौजूद होते हैं।
पानी में सीवर बैक्टीरिया की पुष्टि
Indore Water Contamination मामले की शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र से लिए गए पानी के नमूनों में मानव अपशिष्ट से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं। यह जानकारी अधिकारियों ने तीन दिन बाद दी, जब उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।
महत्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया—
“प्रारंभिक रिपोर्ट में सीवर जल में पाए जाने वाले असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। हालांकि, सटीक बैक्टीरिया की पहचान के लिए कल्चर रिपोर्ट और मरीजों के स्टूल टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार है।”
सीवर लाइन से पाइपलाइन में रिसाव की आशंका
अधिकारियों का कहना है कि यह संक्रमण सीवर लाइन के लीकेज के कारण पेयजल पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने से फैला हो सकता है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष सभी रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा।
NHRC और हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
NHRC ने अपने बयान में कहा—
“स्थानीय लोगों ने कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की।”
वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी राज्य सरकार से पूरी रिपोर्ट तलब की है।
सरकार की घोषणा: मुआवज़ा और मुफ्त इलाज
लगातार बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता देने और सभी प्रभावित मरीजों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। सरकार ने आपात कदम उठाने का भी भरोसा दिलाया है।
25 दिसंबर से आ रही थी बदबू की शिकायत
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, 25 दिसंबर को पहली बार पानी से अजीब गंध आने की शिकायत मिली थी। एक स्थानीय निवासी ने बताया—
“समस्या कई हफ्तों से थी, लेकिन 25 दिसंबर के बाद स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ गई।”
अब तक 2,456 लोग उल्टी-दस्त जैसे लक्षणों की शिकायत कर चुके हैं, जिनमें से 162 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है।
Indore Water Contamination ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहरी बुनियादी ढांचे और निगरानी तंत्र आम नागरिकों की जान की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं। समय रहते चेतावनी और कार्रवाई होती, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।
