भोपाल–इंदौर में दूषित पानी का कहर: 5 माह के अव्यान की मौत, भरोसे ने छीन ली दस साल बाद मिली खुशियां

भोपाल/इंदौर।
Contaminated Water Baby Death: “भगवान ने दस साल बाद खुशी दी… और फिर वही खुशी छीन ली।”
इंदौर के भागीरथपुरा की एक संकरी गली में बैठी एक बुजुर्ग महिला यह वाक्य बार-बार बुदबुदा रही है। घर में न रोने की आवाज़ है, न किसी के बोलने की हिम्मत—बस एक भारी, चुपचाप टूटता हुआ सन्नाटा है।

इसी घर में पांच महीने के मासूम अव्यान साहू ने आख़िरी सांस ली। वह बच्चा, जिसे किसी बीमारी ने नहीं, बल्कि भरोसे में लिए गए पानी ने मार डाला।


मां के पास दूध नहीं था, भरोसा था

अव्यान की मां के शरीर में दूध नहीं बन पाया। यह कोई बीमारी नहीं थी, बस एक जैविक सच्चाई थी। डॉक्टरों की सलाह पर पैकेट दूध में थोड़ा पानी मिलाकर बच्चे को पिलाया जा रहा था।
वही नर्मदा का नल का पानी, जिसे परिवार शुद्ध मानता था। वही पानी, जो बाद में दूषित निकला।

यही पानी Contaminated Water Baby Death की वजह बना।


अचानक बिगड़ी हालत, रास्ते में मौत

अव्यान के पिता सुनील साहू, एक निजी कूरियर कंपनी में काम करते हैं। दस साल बाद 8 जुलाई को बेटे का जन्म हुआ था। परिवार खुश था, सब कुछ सामान्य था।

लेकिन दो दिन पहले अव्यान को बुखार और दस्त शुरू हुए। डॉक्टर को दिखाया गया, दवाइयां दी गईं, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई।
रविवार रात तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। सोमवार सुबह अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही अव्यान की मौत हो गई।


“किसी ने नहीं बताया पानी खराब है”

सुनील साहू का कहना है—

“हमने पानी को फिल्टर किया, फिटकरी डाली, पूरी सावधानी बरती। मोहल्ले में सभी लोग यही पानी इस्तेमाल कर रहे थे। किसी ने नहीं बताया कि पानी दूषित है। कोई चेतावनी नहीं दी गई।”

उनका मानना है कि दूध में मिलाया गया वही पानी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।


आरोप नहीं, सिर्फ़ टूटता विश्वास

बुजुर्ग दादी की आवाज़ में थकान और बेबसी है—

“हम गरीब हैं। बेटा प्राइवेट नौकरी करता है, उसी से घर चलता है। हम किसी पर आरोप नहीं लगा सकते। भगवान ने खुशी दी… और फिर ले ली।”

घर के अंदर मां बार-बार बेहोश हो रही है।
10 साल की बहन किंजल चुपचाप बैठी है—शायद समझ चुकी है कि जो टूटा है, वह अब जुड़ नहीं सकता।


सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल

यह सिर्फ अव्यान साहू की कहानी नहीं है।
यह उस मां की कहानी है, जिसके पास दूध नहीं था, लेकिन भरोसा था।
यह उस दादी की कहानी है, जिसके पास अब शब्द नहीं, सिर्फ आंसू हैं।
और यह उस शहर की कहानी है, जो खुद को साफ़ कहता है, लेकिन जिसकी खामोशी अब उसका सबसे बड़ा दाग बन चुकी है।


✨ निष्कर्ष

Contaminated Water Baby Death ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या साफ पानी सिर्फ एक दावा है, या हर नागरिक का हक़?
और अगर पानी ज़हर बन जाए, तो जिम्मेदारी किसकी है?

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