रायपुर प्रेस क्लब में साहित्यकारों को श्रद्धांजलि: संवेदनशीलता और ईमानदारी से ही बनता है बड़ा रचनाकार

Raipur Press Club Shradhanjali Sabha रायपुर में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), जनवादी लेखक संघ (जलेस) और जन संस्कृति मंच (जसम) से जुड़े रचनाकारों ने साहित्य की तीन महान विभूतियों—विनोद कुमार शुक्ल, नासिर अहमद सिकंदर और शायर रज़ा हैदरी—को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह सभा केवल स्मरण नहीं थी, बल्कि संवेदनशीलता, ईमानदारी और मनुष्यता के पक्ष में खड़े सृजन को सलाम करने का अवसर भी बनी।

ज्ञात हो कि दिसंबर 2025 में इन तीनों प्रतिष्ठित रचनाकारों का निधन हुआ था, जिससे साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची।


“मनुष्यता के पक्षधर थे विनोद कुमार शुक्ल”

प्रलेस रायपुर के अध्यक्ष अरुणकांत शुक्ला ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का लेखन मनुष्यता का गहरा पक्षधर रहा। उन्होंने कवि नासिर अहमद सिकंदर को जीवनभर चेतनाशील रचनाकारों को जोड़ने वाला संगठनकर्ता बताया, जबकि शायर रज़ा हैदरी को आमजन के सुख-दुख से जुड़ा सृजनकर्ता कहा। उनका मानना था कि तीनों साहित्यकारों का जाना साहित्य के लिए ऐसी रिक्तता है, जिसे भरा नहीं जा सकता।


अनूठा शिल्प और वैचारिक प्रतिबद्धता

जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष परदेशी राम ने विनोद कुमार शुक्ल के अनूठे शिल्प की चर्चा की। साथ ही उन्होंने नासिर अहमद सिकंदर को आजीवन सांप्रदायिकता के खिलाफ मुखर आवाज़ बताया, जो संगठन के लिए निरंतर सक्रिय रहे।


संवेदनशीलता और ईमानदारी का संगम

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सचिव राजकुमार सोनी ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल इसलिए बड़े रचनाकार थे क्योंकि वे जितने संवेदनशील थे, उतने ही ईमानदार भी। उन्होंने नासिर अहमद सिकंदर को नए सशक्त कवि-स्वरों को पहचानने वाला रचनाकार बताया, जबकि रज़ा हैदरी को हिंदी और उर्दू के बीच सेतु कहा।


साहित्य की खुशबू हमेशा रहेगी

शायर मीर अली मीर ने तीनों साहित्यकारों की तुलना खुशबू से करते हुए कहा कि वे अपने जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ की मिट्टी में खाद बनकर नई पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे।
उर्दू साहित्य के संदर्भ में सुखनवर हुसैन सुखनवर ने रज़ा हैदरी के साहित्यिक योगदान और उनके संस्थागत कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।


स्मृतियाँ, अनुभव और प्रेरणा

सभा में डॉ. नंदन, नंद कुमार कंसारी, आलोक वर्मा, कमल शर्मा और आफताब बेगम सहित कई साहित्यकारों ने अपने अनुभव साझा किए। संचालन कर रहे जलेस के राज्य महासचिव पीसी रथ ने दिवंगत रचनाकारों के निष्काम योगदान और सृजनात्मक ईमानदारी को रेखांकित किया।


रचनात्मक उपस्थिति और आभार

सभा को निसार अली, मिनहाज असद, फ़ज़ले अब्बास सैफी, सनियारा ख़ान सहित कई रचनाकारों ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में जलेस की ओर से शिज्जू शकूर ने आभार व्यक्त किया।


Raipur Press Club Shradhanjali Sabha यह संदेश देती है कि सच्चा साहित्य वही है, जो संवेदनशीलता और ईमानदारी से जन्म लेता है। विनोद कुमार शुक्ल, नासिर अहमद सिकंदर और रज़ा हैदरी का सृजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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