1970 से 21वीं सदी तक भारत-बांग्लादेश रिश्तों की अहम कड़ी रहीं खालिदा जिया

बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना के अलावा यदि किसी नेता का भारत के साथ रिश्ता दशकों तक लगातार बना रहा, तो वह नाम है खालिदा जिया
Khaleda Zia India Bangladesh Relations केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दक्षिण एशिया के कई नाजुक और निर्णायक दौरों के साक्षी बने।

खालिदा जिया, जिन्हें बांग्लादेश में बेगम जिया कहा जाता है, ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रपति जनरल जियाउर रहमान की पत्नी के रूप में की। 1970 के दशक के कठिन समय में उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को बेहद करीब से देखा।


🇮🇳🇧🇩 1970 का दशक: अस्थिरता के बीच कूटनीति

भारतीय कूटनीतिक दस्तावेजों में खालिदा जिया का पहला उल्लेख 16 अप्रैल 1979 को मिलता है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ढाका दौरे पर गए थे। उस वक्त द्विपक्षीय रिश्ते तनावपूर्ण थे।
शेख मुजीबुर रहमान की हत्या हो चुकी थी और भारत में इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर थीं।

इससे पहले, दिसंबर 1977 में राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने राष्ट्रपति जियाउर रहमान के सम्मान में दिल्ली में भोज दिया था। यह दौर दोनों देशों के लिए संवेदनशील था, क्योंकि शेख हसीना उस समय भारत में निर्वासन में थीं


🔴 जियाउर रहमान की हत्या और भारत की प्रतिक्रिया

30 मई 1981 को राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे विकासशील देशों में अस्थिरता का संकेत बताया और भारत की सुरक्षा सतर्कता पर जोर दिया।

यह बयान बताता है कि उस समय Khaleda Zia India Bangladesh Relations कितने संवेदनशील और रणनीतिक थे।


👩‍⚖️ बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री

20 मार्च 1991 को खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। यह समय पूरे उपमहाद्वीप के लिए उथल-पुथल भरा था।
भारत में भी राजनीतिक बदलाव हो रहे थे और दोनों देशों ने रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश की।

भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि लोकतांत्रिक बांग्लादेश के साथ मजबूत संबंध भारत की प्राथमिकता हैं।


🌏 SAARC और क्षेत्रीय सहयोग

1992 में खालिदा जिया भारत आईं और प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि SAARC, उनके दिवंगत पति का सपना, उनके दिल के बेहद करीब है।

1993 में ढाका SAARC शिखर सम्मेलन इसका बड़ा उदाहरण बना, जहां भारत-पाकिस्तान सहित पूरे दक्षिण एशिया के शीर्ष नेता मौजूद थे।
यह सब उस दौर में हुआ, जब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर था।


🌪️ संकट में भारत की मदद

1991 और बाद में आए विनाशकारी चक्रवातों के दौरान भारत ने बांग्लादेश को राहत भेजी। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग मजबूत हुआ।


🔄 दूसरा कार्यकाल और चुनौतियां

2001 से 2006 के बीच खालिदा जिया के कार्यकाल में 2002 के गुजरात दंगों और आतंकवाद जैसे मुद्दों ने रिश्तों पर असर डाला।
फिर भी, उन्होंने भारत का दौरा किया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ संशोधित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए।


🕊️ आखिरी मुलाकातें

  • 2012 में, विपक्ष की नेता के रूप में, खालिदा जिया भारत आईं
  • 2015 में, भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते के बाद, उन्होंने ढाका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की

यही उनकी भारतीय नेतृत्व के साथ अंतिम चर्चित बातचीत मानी जाती है।


Khaleda Zia India Bangladesh Relations इतिहास, संघर्ष, सहयोग और कूटनीति का ऐसा अध्याय हैं, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया।
खालिदा जिया केवल बांग्लादेश की प्रधानमंत्री नहीं रहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की एक जीवंत कड़ी भी थीं।

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