India fourth largest economy: भारत ने वैश्विक आर्थिक मंच पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सरकार की वर्षांत आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा रफ्तार बरकरार रही, तो भारत अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को भी पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि, इस उपलब्धि की अंतिम पुष्टि IMF द्वारा 2026 की पहली छमाही में जारी आंकड़ों के बाद होगी।
दस साल में दोगुनी हुई अर्थव्यवस्था
पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग दोगुना हो चुका है। लगातार कई वर्षों से भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
सरकारी आर्थिक नोट में कहा गया है कि भारत की विकास क्षमता मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में यह गति कायम रह सकती है।
IMF के अनुमान के मुताबिक,
- 2026 में भारत की GDP: 4.51 ट्रिलियन डॉलर
- जापान की GDP: 4.46 ट्रिलियन डॉलर
यानी भारत की बढ़त और भी स्पष्ट होती जा रही है।
हाई ग्रोथ, लो इन्फ्लेशन: ‘गोल्डीलॉक्स दौर’
सरकार ने मौजूदा आर्थिक हालात को “गोल्डीलॉक्स पीरियड” बताया है—जहां उच्च विकास दर और कम महंगाई एक साथ मौजूद हैं।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:
- महंगाई दर सहनशील सीमा से नीचे बनी हुई है
- बेरोज़गारी में धीरे-धीरे कमी आ रही है
- निर्यात में स्थिर सुधार देखने को मिल रहा है
इसके अलावा, शहरी खपत में बढ़ोतरी और कारोबारियों को मिल रहा पर्याप्त कर्ज़ भी मांग को मजबूती दे रहा है।
जीडीपी ग्रोथ और आरबीआई का भरोसा
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 8.2% दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही से तेज़ रही।
औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने इस वृद्धि को गति दी।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी भरोसा जताते हुए
- FY 2025-26 का ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।
इसके पीछे घरेलू मांग, कर सुधार, कच्चे तेल की नरम कीमतें और नियंत्रित महंगाई जैसे कारक अहम माने जा रहे हैं।
महंगाई और ब्याज दरों में राहत
जनवरी में CPI महंगाई 4.26% रही और साल के दूसरे हिस्से में यह ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गई।
खाद्य कीमतों में गिरावट से महंगाई पर खास असर पड़ा।
इसी के चलते RBI ने इस साल
- रेपो रेट में कुल 1.25% की कटौती की
- ब्याज दर 6.5% से घटकर 5.25% पर आ गई
भारत की मजबूत बाहरी स्थिति
भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति भी मजबूत बनी हुई है।
- चालू खाता घाटा (CAD) घटकर GDP का 1.3% रह गया
- सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाली रेमिटेंस में तेज़ बढ़ोतरी हुई
- रेमिटेंस में 10.7% सालाना वृद्धि दर्ज की गई
सरकार का मानना है कि ये कारक आने वाले समय में भी भारत को आर्थिक रूप से स्थिर बनाए रखेंगे।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की उड़ान
अमेरिका द्वारा अगस्त में लगाए गए कुछ टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि संरचनात्मक सुधार और घरेलू मांग भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।
