Angel Chakma murder case देहरादून। उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या का मामला फिलहाल नस्लीय (रेसिस्ट) एंगल से जुड़ा नहीं पाया गया है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में नस्लीय टिप्पणी या सुनियोजित नस्लीय हमले के कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।
एंजेल चकमा देहरादून में एमबीए का छात्र था। 9 दिसंबर को उस पर कुछ युवकों ने चाकू और अन्य हथियारों से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।
SSP देहरादून का बयान
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने समाचार एजेंसी ANI से कहा,
“प्रारंभिक जांच में इस मामले में नस्लीय टिप्पणी से जुड़े कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। जांच अभी जारी है।”
उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। SSP के मुताबिक,
“घटना की शिकायत 24 घंटे बाद दर्ज कराई गई थी, इसके बावजूद विधिसम्मत कार्रवाई की गई।”
आरोपियों की स्थिति: पांच गिरफ्तार, एक फरार
पुलिस के अनुसार, इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी नेपाली मूल का है और अभी फरार है।
गिरफ्तार लोगों में एक मणिपुर और एक भोक्सा समुदाय से जुड़ा आरोपी भी शामिल है। इसके अलावा, दो आरोपी नाबालिग हैं, जिन्हें किशोर सुधार गृह भेजा गया है।
पुलिस का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घातक वार किसने किया, क्योंकि सभी आरोपी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
‘मजाक’ में की गई टिप्पणियों से बढ़ा विवाद?
एक पुलिस अधिकारी ने NDTV को बताया कि कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां मजाक में कही गई थीं, जिन्हें गलत तरीके से नस्लीय टिप्पणी समझ लिया गया।
उनके अनुसार,
“एक ही जगह बैठे लोगों के बीच आपसी बातचीत में कुछ शब्द कहे गए, जिससे भ्रम पैदा हुआ और यही विवाद हिंसक झड़प में बदल गया।”
9 दिसंबर की घटना में क्या हुआ था?
पुलिस के मुताबिक, घटना एक शराब दुकान के पास हुई, जहां मणिपुर के रहने वाले एक आरोपी सूरज अपने बेटे का जन्मदिन मना रहा था।
एंजेल चकमा और उसका भाई माइकल भी वहीं से सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस हुई, जो बाद में हिंसा में बदल गई।
हालांकि, मृतक के भाई माइकल चकमा ने आरोप लगाया कि नशे में धुत युवकों ने नस्लीय गालियां दीं और एंजेल पर हमला किया।
किरन रिजिजू की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा,
“नस्लवाद एक बहुत बड़ी बीमारी है। ऐसी घटनाएं बेहद शर्मनाक हैं और देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।”
उन्होंने लोगों से इस मानसिकता के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की।
जांच जारी, सभी पहलुओं पर नजर
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि चिकित्सा लापरवाही या किसी अन्य तथ्य को लेकर शिकायत मिलती है, तो उसकी भी जांच की जाएगी।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है।
