Tamnar coal mine protest Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तम्नार ब्लॉक में प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन शनिवार को हिंसक हो गया। इसके एक दिन बाद जिला प्रशासन ने 8 दिसंबर को हुई जनसुनवाई के नतीजों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। यह वही मांग थी, जिसे लेकर ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे थे।
14 गांवों की आजीविका पर संकट का डर
तम्नार ब्लॉक के 14 गांवों—बुढ़िया, रायपारा, आमगांव, खुरुसलेंगा, धोराभाठा, लिब्रा, बिजना, मेहलोई, बागबरी, झिंकाबहाल, तिलाईपारा, समकेरा, झरना और टंगरघाट—के हजारों ग्रामीण इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि ही उनकी पीढ़ियों से आजीविका का एकमात्र साधन रही है, और खदान आने से उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
कैसे हिंसक हुआ आंदोलन?
12 दिसंबर से चल रहा शांतिपूर्ण धरना शनिवार को उस समय उग्र हो गया, जब पुलिस ने लिब्रा गांव के कोल्ड हैंडलिंग प्लांट चौक पर सड़क पर बैठी करीब 50 महिलाओं को हटाने की कोशिश की। इससे आक्रोश फैला और देखते ही देखते 4,000 से ज्यादा लोग मौके पर जुट गए।
स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी और पुलिस से झड़प हुई। इस दौरान दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
किस परियोजना का हो रहा है विरोध?
यह जनसुनवाई 3,020 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित ओपन-कास्ट-कम-अंडरग्राउंड कोयला खदान के लिए थी, जिसकी उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। यह परियोजना जिंदल समूह को नीलामी के जरिए दी गई है।
ग्रामीणों की आवाज: “यह हमारी पहचान है”
झिंकाबहाल गांव की कमला पटेल कहती हैं,
“हम साधारण किसान हैं। हमारे पास यही जमीन है। अगर यह चली गई, तो हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा?”
वहीं आमगांव के मुरलीधर नायक का कहना है,
“90 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं। हमारे पास कोई और कौशल नहीं है। खदान नहीं चाहिए।”
एक अन्य ग्रामीण ने भावुक होकर कहा,
“यह सिर्फ जमीन नहीं, हमारी पहचान है। यह हमारी पुश्तैनी भूमि है।”

प्रशासन और कंपनी का पक्ष
घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांच के आदेश दिए।
उन्होंने कहा, “तम्नार की घटना की जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने ग्रामीण प्रतिनिधियों से बैठक के बाद बताया कि जनसुनवाई के नतीजों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वहीं जिंदल स्टील के अध्यक्ष प्रदीप टंडन ने कहा कि कंपनी स्थानीय लोगों से संवाद जारी रखेगी और मुआवजा, रोजगार और वैकल्पिक आवास जैसी सुविधाओं पर काम करेगी।
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। जनसुनवाई के रद्द होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कोयला खदान परियोजना का भविष्य अब भी अनिश्चित बना हुआ है।
