छत्तीसगढ़ के मजदूर रामनारायण बघेल की हत्या में RSS-BJP से जुड़े लोगों की भूमिका उजागर

Kerala Mob Lynching News: केरल के पलक्कड़ जिले के वालयार में छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर रामनारायण बघेल की नृशंस हत्या के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती दौर में इस घटना को लेकर केरल सरकार पर राजनीतिक हमले किए गए, लेकिन अब जांच में RSS-BJP से जुड़े लोगों की संलिप्तता उजागर होने के बाद माहौल बदलता नजर आ रहा है।


🧑‍🌾 कौन थे रामनारायण बघेल?

रामनारायण बघेल छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव के निवासी थे। वे एक कृषि मजदूर थे और सीमित जमीन से परिवार का पालन-पोषण कर पाना उनके लिए संभव नहीं था। इसलिए खेती के बाद काम की तलाश में वे हर साल दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते थे।

केरल को उन्होंने इसलिए चुना, क्योंकि वहां मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक है और प्रवासी श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है।


❌ “बांग्लादेशी” बताकर पीट-पीटकर हत्या

जांच के अनुसार, रामनारायण बघेल को झूठे तौर पर अवैध बांग्लादेशी नागरिक बताकर भीड़ ने घेर लिया। यह विडंबना है कि वे न तो बांग्लादेशी थे, न ही बंगाली भाषा जानते थे। वे हिंदू थे और हालिया चुनाव में भाजपा को वोट देने वाले मतदाता भी थे।

इसके बावजूद, नफरत और अफवाहों के आधार पर उन्हें भीड़ ने बेरहमी से पीट दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।


🚨 RSS-BJP से जुड़े आरोपी, आपराधिक इतिहास उजागर

केरल सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार आरोपी—

  • अनु (अप्पुन्नी का पुत्र): 9 आपराधिक मामले दर्ज
  • प्रसाद (चंद्रन का पुत्र): 2 मामले
  • मुरली (चाथु का पुत्र): 3 मामले

इन सभी पर पहले से हमले और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के लिए सक्रिय प्रचारक रहे थे।


🏛️ केरल बनाम छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिक्रिया

इस Kerala Mob Lynching News के बाद—

  • केरल सरकार ने तुरंत गिरफ्तारी,
  • मृतक के परिवार को ₹30 लाख मुआवजा,
  • और सभी प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई।

वहीं, छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने केवल ₹5 लाख मुआवजे की घोषणा की, जबकि परिवार को अब भी स्थायी सहायता का इंतजार है।


⚖️ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे मानवता का सवाल

यह मामला अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल उठाता है कि—

  • प्रवासी मजदूरों को अफवाहों के आधार पर निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
  • और भीड़ हिंसा को रोकने में समाज व राजनीति की जिम्मेदारी क्या है?

रामनारायण बघेल की मौत यह दिखाती है कि नफरत की राजनीति का शिकार कोई भी हो सकता है—धर्म, भाषा या पहचान से परे।


रामनारायण बघेल की कहानी एक साधारण मजदूर की थी, जो सम्मान और रोज़गार की तलाश में घर से निकला था। लेकिन वह नफरत की राजनीति का शिकार बन गया। यह घटना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि अफवाह, पहचान की राजनीति और भीड़ हिंसा कितनी घातक हो सकती है।

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