Divya Hanumant Katha Bhilai: औद्योगिक नगरी भिलाई में चल रही दिव्य हनुमंत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। जयंती स्टेडियम स्थित कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से पहुंचे भक्तों ने कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
हनुमान चालीसा की चौपाई का भावपूर्ण व्याख्यान
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी ने हनुमान चालीसा की छठवीं चौपाई
“हाथ बज्र और ध्वजा विराजे”
का भावार्थ समझाते हुए कहा कि यह चौपाई केवल शक्ति का नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और आत्मबल का प्रतीक है।
उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सनातन धर्म और हिंदू समाज को माला (भक्ति) और भाला (साहस) – दोनों की आवश्यकता है।
“श्रीराम के बिना हनुमान अधूरे हैं” – पंडित शास्त्री
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भावुक शब्दों में कहा कि
“श्रीराम के बिना हनुमान अधूरे हैं और हनुमान के बिना श्रीराम की लीला पूर्ण नहीं होती।”
उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा का प्रत्येक शब्द केवल भगवान की महिमा नहीं करता, बल्कि मानव जीवन के आदर्श, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों को भी दर्शाता है।

भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु
कथा के बीच जब श्रीराम-हनुमान भक्ति से ओतप्रोत स्तुति भजन गूंजे, तो पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते और जयकारे लगाते नजर आए। यह दृश्य हर भक्त के मन को छू गया।
अनेक जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
इस पावन अवसर पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने कथा श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय
- भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय
- सांसद विजय बघेल एवं धर्मपत्नी श्रीमती रजनी बघेल
- दुर्ग व भिलाई की महापौर अल्का बाघमार, नीरज पाल
- जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे
- विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि
शनिवार को लगेगा दिव्य दरबार
हनुमंत कथा के तीसरे दिन (शनिवार) को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक दिव्य दरबार लगाया जाएगा। इसमें पर्ची के माध्यम से श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान बताए जाएंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक पुनः कथा का आयोजन होगा।
सेवा समर्पण संस्था कर रही आयोजन
यह भव्य आयोजन सेवा समर्पण संस्था द्वारा, संयोजक राकेश पाण्डेय के नेतृत्व में किया जा रहा है। दुर्ग, भिलाई, रायपुर, राजनांदगांव सहित प्रदेश और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं।

हनुमान चालीसा आज भी उतनी ही प्रासंगिक
पंडित शास्त्री जी ने कहा कि हनुमान चालीसा अधर्म और नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध वज्र बाण है। यदि मनुष्य इसे अपने आचरण में उतार ले, तो उसका कल्याण निश्चित है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह ग्रंथ आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस काल में था।
