हर 18 घंटे में एक शिकार, नए साल में ‘गिफ्ट’ के नाम पर डिजिटल लूट

Chhattisgarh online fraud: छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे तकनीक आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है,
वैसे-वैसे ‘डिजिटल डकैतों’ का आतंक भी तेजी से बढ़ रहा है

आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में हर 18वें घंटे कोई न कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहा है
जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 962 लोग Chhattisgarh online fraud के जाल में फंस चुके हैं।

नए साल के जश्न के बीच अब ‘गिफ्ट भेजने’ के नाम पर ठगी का नया तरीका सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

शहरी इलाकों में ज्यादा वारदात, रायपुर संभाग सबसे आगे

साइबर अपराध के आंकड़ों का विश्लेषण साफ दिखाता है कि शहरी क्षेत्र ठगों के सबसे आसान शिकार बन रहे हैं

  • रायपुर – 164 मामले
  • बिलासपुर – 159 मामले
  • सरगुजा – 81 मामले

रायपुर संभाग में स्थिति यह है कि हर दूसरे दिन ऑनलाइन ठगी का नया मामला सामने आ रहा है।

इसके उलट, नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में साइबर ठगी के मामले सबसे कम दर्ज हुए हैं।
सुकमा जैसे जिले में सिर्फ एक मामला सामने आना यह सवाल खड़ा करता है कि

जहां डिजिटल पहुंच ज्यादा है, क्या वहां सतर्कता कम है?

पुलिस की चेतावनी: जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस भी अब तकनीकी और रणनीतिक रूप से सक्रिय हुई है।

रायपुर के एएसपी लखन पटले का कहना है कि—

“साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है।”

पुलिस की तत्परता का ही नतीजा है कि
करीब 82.5 करोड़ रुपये की ठगी की राशि पीड़ितों के खातों से निकलने से पहले ही होल्ड करा ली गई।

पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि—

  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • लुभावने ऑफर से सावधान रहें
  • OTP और बैंक डिटेल किसी से साझा न करें

साइबर अपराध पर गरमाई राजनीति

Chhattisgarh online fraud के बढ़ते मामलों को लेकर अब सियासत भी गरमा गई है।

  • कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है
  • कांग्रेस मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए

वहीं,

  • बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि
    सरकार और पुलिस मिलकर लगातार जागरूकता अभियान चला रही है

राजनीतिक बहस के बीच सच्चाई यही है कि
पढ़े-लिखे और जागरूक कहे जाने वाले लोग भी ठगों के झांसे में आ रहे हैं

निष्कर्ष: तकनीक के साथ समझ भी जरूरी

आज का दौर डिजिटल है, लेकिन
डिजिटल साक्षरता सिर्फ मोबाइल चलाना नहीं, बल्कि खतरे पहचानना भी है

यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई,
तो ऑनलाइन ठगी का यह जाल और भी गहराता जाएगा।

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