भारत-चीन रिश्तों में सुधार से अमेरिका बेचैन, नीति को बताया तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया

China India US relations: बीजिंग से आए एक सख्त बयान में चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत-चीन संबंधों को लेकर उसकी रक्षा नीति को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है
चीन का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत और चीन के बीच हाल में आए सुधार से अमेरिका-भारत रिश्तों की गहराई पर असर न पड़े

चीन का स्पष्ट संदेश: भारत-चीन संबंध हमारे आपसी मामले

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि
चीन भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है

उन्होंने साफ शब्दों में कहा—

“सीमा विवाद भारत और चीन के बीच का मामला है। किसी तीसरे देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”

यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत-चीन सीमा पर तनाव में हाल के महीनों में कुछ कमी देखी गई है

पेंटागन रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन की एक हालिया रिपोर्ट है।
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि—

चीन, भारत के साथ सीमा तनाव में आई कमी का फायदा उठाकर
भारत-चीन रिश्तों को स्थिर करना चाहता है, ताकि अमेरिका-भारत संबंध और गहरे न हों।

चीन ने इस आकलन को निराधार और भ्रामक करार दिया है।

भू-राजनीति में बदलते समीकरण

विशेषज्ञ मानते हैं कि China India US relations इस समय एशिया की राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन चुके हैं।
एक ओर भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है,
तो दूसरी ओर चीन किसी भी तीसरे देश की दखलअंदाजी से साफ इंकार कर रहा है।

यही वजह है कि चीन का यह बयान केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।

आगे क्या?

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि—

  • भारत इस बयान पर क्या रुख अपनाता है
  • अमेरिका अपने आकलन में कोई बदलाव करता है या नहीं
  • और क्या भारत-चीन सीमा पर बातचीत की प्रक्रिया और आगे बढ़ती है

फिलहाल इतना तय है कि एशिया की राजनीति में तीनों देशों के रिश्ते नए मोड़ पर खड़े हैं

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