IGMC Shimla doctor patient assault मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा मरीज की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।
🎥 वायरल वीडियो में क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डॉ. राघव नरूला (31), जो पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में सीनियर रेजिडेंट हैं, एक मरीज से लोहे की रॉड छीनकर उस पर हमला करते दिख रहे हैं।
मरीज की पहचान अर्जुन पंवार (36) के रूप में हुई है, जो अस्पताल के बेड पर लेटे हुए थे।
वीडियो में साफ दिखता है कि मरीज खुद को बचाने की कोशिश करता है, लेकिन इसके बावजूद उसे कई बार मारा जाता है।
🗣️ मरीज का दर्द: “सांस लेने में तकलीफ थी”
अर्जुन पंवार ने NDTV से बातचीत में बताया कि ब्रोंकोस्कोपी के बाद उन्हें सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही थी।
उन्होंने ऑक्सीजन मांगी, लेकिन इसी दौरान भाषा और सम्मान को लेकर विवाद शुरू हो गया।
“मैंने बस इतना कहा कि मुझसे सम्मान से बात की जाए। इसके बाद डॉक्टर नाराज हो गए और मारपीट शुरू कर दी,”
— अर्जुन पंवार, पीड़ित मरीज
⚖️ डॉक्टर का पक्ष: आत्मरक्षा का दावा
निलंबित डॉक्टर डॉ. राघव नरूला ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो अधूरा है।
उनका दावा है कि मरीज ने पहले गाली-गलौज और हमला किया, जिसके बाद उन्होंने आत्मरक्षा में कदम उठाया।
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी डॉक्टर का समर्थन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
🚔 पुलिस जांच और सरकार का रुख
शिमला पुलिस ने पुष्टि की है कि डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।
एसपी संजीव गांधी के अनुसार, वीडियो फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने साफ कहा है:
“यदि दोष सिद्ध होता है तो कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
🏛️ राजनीति भी गरमाई
घटना को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
उनका कहना है कि यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में गिरते मानकों को उजागर करता है।
🔍 बड़ा सवाल: अस्पताल सुरक्षित हैं या नहीं?
IGMC Shimla doctor patient assault जैसी घटनाएं सिर्फ एक व्यक्ति की गलती नहीं होतीं, बल्कि यह पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल उठाती हैं।
जहां मरीज इलाज के लिए आता है, वहीं अगर डर का माहौल बन जाए, तो भरोसा कैसे बचेगा?
✍️ निष्कर्ष
यह मामला केवल एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि डॉक्टर-मरीज संबंधों, भाषा की मर्यादा और अस्पतालों में मानवता की परीक्षा है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—ताकि सच सामने आए और न्याय सुनिश्चित हो सके।
