अमेरिका के नए नियमों से भारतीय IT कंपनियों पर सीमित असर, सीनियर टैलेंट को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली:
H-1B visa rule change: अमेरिका द्वारा H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेज-बेस्ड चयन प्रणाली लागू करने के फैसले को लेकर भले ही शुरुआती चिंता दिखी हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बड़ी भारतीय IT सर्विस कंपनियों पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा

दरअसल, यह फैसला उस बदलाव को औपचारिक रूप देता है, जिसकी ओर भारतीय IT इंडस्ट्री पिछले कई वर्षों से खुद को ढाल चुकी है।


क्या है नया H-1B Visa Rule Change?

अमेरिकी सरकार ने H-1B वीजा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए—

  • रैंडम लॉटरी सिस्टम को खत्म किया
  • वेज-वेटेड (वेतन आधारित) चयन प्रणाली लागू की
  • पहले से लागू $100,000 की भारी आवेदन फीस को बरकरार रखा

अब ज्यादा वेतन वाली नौकरियों को H-1B वीजा मिलने की संभावना अधिक होगी, जबकि एंट्री-लेवल और कम वेतन वाले रोल्स पीछे रह सकते हैं।


भारतीय IT कंपनियों को क्यों नहीं लगेगा बड़ा झटका?

विशेषज्ञों के अनुसार, Infosys, TCS, Wipro, HCL जैसी बड़ी भारतीय IT कंपनियां—

  • पहले ही जूनियर टैलेंट को अमेरिका भेजना कम कर चुकी हैं
  • अब सीनियर, स्पेशलाइज्ड और क्लाइंट-फेसिंग प्रोफेशनल्स पर फोकस कर रही हैं
  • भारत से ऑफशोर डिलीवरी मॉडल को लगातार मजबूत कर रही हैं

Amrop India के पार्टनर प्रशांत यादव के मुताबिक,

“$100,000 फीस जूनियर कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक नहीं है। लेकिन सीनियर और विशेषज्ञ टैलेंट के लिए अब वीजा पाना अपेक्षाकृत आसान होगा।”


भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर क्यों ज्यादा?

H-1B visa rule change का असर भारतीयों पर ज्यादा इसलिए दिखेगा क्योंकि—

  • हर साल जारी होने वाले H-1B वीजा में 70–75% भारतीयों को मिलते हैं
  • 2024 में 71% H-1B वीजा भारतीयों के नाम रहे
  • चीन दूसरे स्थान पर, लेकिन काफी पीछे

नए नियमों के तहत—

  • Level III और Level IV वेतन वाले उम्मीदवारों को ज्यादा मौके
  • Level I (जूनियर) प्रोफेशनल्स को नुकसान
  • स्टूडेंट्स, रिसर्च और हेल्थकेयर सेक्टर में अवसर घट सकते हैं

जूनियर प्रोफेशनल्स के लिए बढ़ी चुनौती

इमिग्रेशन वकील ज्ञानमूकन सेंथुरज्योति के अनुसार,

“वेज-वेटेड सिस्टम में सीनियर प्रोफाइल को कई एंट्री मिलती हैं, जबकि जूनियर को सिर्फ एक। इससे नए ग्रेजुएट्स को नुकसान होगा।”

ऊपर से $100,000 फीस ने कंपनियों के लिए
पहली बार H-1B हायरिंग को और महंगा बना दिया है।


ऑफशोर डिलीवरी को मिलेगा और बल

जैसे-जैसे अमेरिका में ऑन-साइट हायरिंग महंगी और सीमित होगी—

  • भारत से ऑफशोर डिलीवरी और बढ़ेगी
  • कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट्स में ऑफशोर मिक्स बढ़ाएंगी
  • AI, इंजीनियरिंग और डेटा हब भारत में शिफ्ट होंगे

Everest Group के अक्षत वैद के मुताबिक,

“अल्पकाल में कुछ काम ऑफशोर जाएगा और यह ट्रेंड और मजबूत होगा।”


मार्जिन पर दबाव, लेकिन संभालने लायक

हालांकि—

  • शुरुआत में मार्जिन पर दबाव दिख सकता है
  • लेकिन यह असर लंबे समय में संतुलित हो जाएगा

खास बात यह है कि
👉 $100,000 फीस सिर्फ नई H-1B याचिकाओं पर लागू होगी,
न कि रिन्यूअल या मौजूदा वीजा होल्डर्स पर।

इससे बड़े झटके की आशंका काफी हद तक खत्म हो गई है।


Big Tech बनाम Indian IT

नया सिस्टम—

  • Google, Apple, Meta जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है
  • क्योंकि उनकी H-1B सैलरी भारतीय IT कंपनियों से कहीं ज्यादा होती है

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि—

  • यही Big Tech कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं
  • हैदराबाद, बेंगलुरु में नए हब
  • AI और इंजीनियरिंग पर बड़ा दांव

झटका नहीं, पहले से चल रहे बदलावों की मुहर

कुल मिलाकर, H-1B visa rule change
भारतीय IT इंडस्ट्री के लिए कोई अचानक आया तूफान नहीं है।

यह सिर्फ इस सच्चाई को आधिकारिक रूप देता है कि—

  • जूनियर रोल्स कम होंगे
  • सीनियर और विशेषज्ञ टैलेंट की मांग बढ़ेगी
  • भारत से ऑफशोर डिलीवरी भविष्य की रीढ़ बनेगी

यानी,
👉 यह बदलाव संकट नहीं, बल्कि पहले से बदली रणनीति की पुष्टि है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *