अरावली में नई खनन लीज पर पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र का बड़ा फैसला

नई दिल्ली:
Aravalli mining ban: देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली को बचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक अहम और दूरगामी फैसला लिया। अरावली रेंज में किसी भी तरह की नई खनन लीज पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह फैसला हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अरावली की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने स्पष्ट किया कि यह Aravalli mining ban पूरे अरावली भू-भाग पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वह दिल्ली हो, हरियाणा, राजस्थान या गुजरात।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र का सख्त रुख

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने TN Godavarman Thirumulpad बनाम भारत संघ मामले में 20 नवंबर को सुनवाई के दौरान साफ कहा था कि जब तक सतत खनन के लिए प्रबंधन योजना (MPSM) तैयार नहीं हो जाती, तब तक अरावली में कोई नई खनन लीज नहीं दी जाएगी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि

  • अरावली क्षेत्र में नई खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा
  • पहले से चल रही खदानों में पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा

यह कदम केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी माना जा रहा है।


ICFRE को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी

सरकार ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) को यह जिम्मेदारी दी है कि वह पूरे अरावली क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर ऐसे अतिरिक्त संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करे,
जहां खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

इस अध्ययन में

  • पारिस्थितिकी
  • भूवैज्ञानिक संरचना
  • और लैंडस्केप स्तर के प्रभाव

जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।


पहले से चल रही खदानों पर भी कड़ी नजर

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में पूर्ण खनन प्रतिबंध को अव्यावहारिक मानते हुए खारिज किया है, लेकिन उसने यह भी साफ किया है कि

“मौजूदा खदानों में कड़ा नियंत्रण और सख्त निगरानी जरूरी है।”

इसी क्रम में MoEF&CC ने राज्यों से कहा है कि

  • सभी मौजूदा खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का पालन करें
  • किसी भी तरह की ढिलाई पर कठोर कार्रवाई की जाए

अरावली क्यों है इतनी अहम?

अरावली केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है। यह

  • थार मरुस्थल को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकने वाली हरित दीवार है
  • NCR में भूजल रिचार्ज का प्रमुख स्रोत है
  • जैव विविधता और जलवायु संतुलन में इसकी बड़ी भूमिका है

इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इसे “ग्रीन बैरियर” करार दिया है।


भ्रम, सोशल मीडिया और जनता की चिंता

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि अरावली की नई परिभाषा से

“90% अरावली खनन के लिए खुल जाएगी”

हालांकि सरकार और कोर्ट दोनों ने साफ किया है कि

  • नई परिभाषा वैज्ञानिक आधार पर तय की गई है
  • इसका उद्देश्य खनन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि नियंत्रित और टिकाऊ व्यवस्था बनाना है

फिर भी पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों की चिंताओं को देखते हुए सरकार का यह Aravalli mining ban फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।


अरावली के भविष्य की ओर एक मजबूत कदम

अरावली में नई खनन लीज पर पूर्ण प्रतिबंध यह संकेत देता है कि सरकार अब
विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में गंभीर है।

यह फैसला सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि
भविष्य की जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी बेहद जरूरी है।

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