Chhattisgarh Bandh 24 December :छत्तीसगढ़ में आदिवासी आस्था और सामाजिक संतुलन से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
‘सर्व समाज, छत्तीसगढ़’ के बैनर तले विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों ने 24 दिसंबर को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है। यह बंद कांकेर जिले के अमाबेड़ा क्षेत्र में हाल ही में हुए धर्मांतरण से जुड़े टकराव और उसे लेकर प्रशासन की भूमिका पर उठे सवालों के विरोध में बुलाया गया है।
📢 ‘शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक’ बंद का दावा
मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में सर्व समाज, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया कि यह बंद
“पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में”
आयोजित किया जाएगा।
संगठन का कहना है कि इस बंद में राज्यभर के आदिवासी संगठनों, सामाजिक समूहों और नागरिक संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। उद्देश्य किसी प्रकार की अव्यवस्था फैलाना नहीं, बल्कि अपनी बात को सामूहिक और अहिंसक तरीके से सरकार तक पहुंचाना है।
⚖️ प्रशासनिक पक्षपात का आरोप
सर्व समाज का आरोप है कि अमाबेड़ा क्षेत्र में हुई घटनाओं के दौरान आदिवासी समुदाय की आस्था पर हमला हुआ, लेकिन
प्रशासन ने मामले को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ नहीं संभाला।
संगठन के अनुसार, धर्मांतरण से जुड़े विवादों में स्थानीय आदिवासी समाज की भावनाओं और परंपराओं की अनदेखी की गई, जिससे आक्रोश और असंतोष बढ़ा।
🌿 आदिवासी संगठनों की व्यापक भागीदारी
बंद के आह्वान को लेकर आदिवासी क्षेत्रों में बैठकों और जनसंपर्क का दौर जारी है।
संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, आस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बंद के दौरान शांति बनाए रखें और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएं।
संवेदनशील मुद्दे पर संवाद की मांग
छत्तीसगढ़ बंद 24 दिसंबर केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह संकेत है कि राज्य में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर संवाद और भरोसे की जरूरत है।
अब निगाहें सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में किस तरह संतुलन, न्याय और संवाद का रास्ता अपनाते हैं।
