Chhattisgarh Good Governance: सुशासन केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह उस अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने की प्रक्रिया है, जो अक्सर व्यवस्था की मुख्यधारा से दूर रह जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग बीते दो वर्षों में इसी सोच को व्यवहार में उतारता हुआ दिखाई देता है।
इन दो वर्षों में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए अनेक ठोस और जनहितकारी निर्णय लिए गए हैं।
💻 डिजिटल सुशासन की मजबूत नींव
छत्तीसगढ़ श्रम विभाग ने पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से समस्त नस्तियों का संधारण शुरू किया। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज हुई और जवाबदेही भी बढ़ी।
इसके साथ ही विभागीय सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने के लिए एक आधुनिक, यूज़र-फ्रेंडली वेबसाइट विकसित की गई।
श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप आज श्रमिक पंजीयन, योजनाओं में आवेदन और श्रमिक पलायन की जानकारी दर्ज करने का प्रभावी डिजिटल माध्यम बन चुका है।
🏢 प्रशासनिक विस्तार से बढ़ी श्रमिकों तक पहुँच
राज्य के नवगठित जिलों में श्रम विभाग की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए पाँच नए श्रम पदाधिकारी कार्यालयों की स्थापना की गई और 20 नए पदों का सृजन हुआ।
वर्ष 2024-25 में 32 नई नियुक्तियों से विभागीय कार्यों को नई गति मिली, जिससे श्रमिकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलने लगीं।
⚖️ श्रम कानूनों में संतुलित सुधार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रम कानूनों में ऐसे सुधार किए गए, जिनसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बना।
छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन से छोटे व्यापारियों को राहत मिली, जबकि नियत कालिक नियोजन कर्मकार की नई श्रेणी ने रोजगार के नए अवसर खोले।
राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन विधेयक, 2025 ने अवैधानिक हड़ताल पर नियंत्रण, छोटे अपराधों में समझौता और लघु उद्योगों को छूट जैसे प्रावधानों के जरिए श्रम व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाया।
👩💼 महिला श्रमिकों के लिए संवेदनशील निर्णय
महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार ने रात्रि पाली में सशर्त महिला नियोजन की अनुमति देकर प्रगतिशील सोच का परिचय दिया।
मिनीमाता महतारी जतन योजना और असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना के अंतर्गत लाखों महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता दी गई, जिससे मातृत्व सुरक्षा को मजबूत आधार मिला।
🤝 श्रमिक कल्याण योजनाओं से बदली ज़मीनी हकीकत
पिछले दो वर्षों में विभिन्न श्रम मंडलों के माध्यम से 11.03 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया और 27.33 लाख श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिला।
इस अवधि में 784.73 करोड़ रुपये से अधिक की राशि श्रमिक कल्याण पर खर्च की गई, जो सरकार की संवेदनशील और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
☎️ 24×7 सहायता और ज़मीनी पहुंच
मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र ने शिकायत निवारण को सरल बनाया, जबकि जिले और विकासखंड स्तर पर संचालित मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्रों ने प्रशासन को सीधे श्रमिकों के द्वार तक पहुंचाया।
निर्माण श्रमिकों के लिए स्व-घोषणा प्रमाण पत्र जैसी सरल प्रक्रिया और मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना ने सैकड़ों परिवारों को पक्के मकान का सपना साकार करने में मदद की।
🎓 शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस
श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, छात्रवृत्ति, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा योजना जैसी पहलों ने शिक्षा के प्रति भरोसा बढ़ाया।
वहीं शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत मात्र पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सुशासन की मानवीय आत्मा को दर्शाता है।
💳 डीबीटी से पारदर्शिता और विश्वास
केन्द्रीकृत डीबीटी प्रणाली के जरिए करोड़ों रुपये सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा, बल्कि शासन में विश्वास भी मजबूत हुआ।
🔚 निष्कर्ष | सुशासन जो ज़मीन पर दिखता है
सुशासन दिवस के अवसर पर श्रम विभाग की यह दो वर्षीय यात्रा इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन में वास्तविक, सकारात्मक और स्थायी बदलाव का माध्यम बन चुका है।
डिजिटल नवाचार, संवेदनशील कानून और सामाजिक सुरक्षा के साथ छत्तीसगढ़ आज एक श्रमिक-हितैषी और समावेशी राज्य के रूप में उभर रहा है।
