छत्तीसगढ़ में चौंकाने वाला खुलासा: जिस युवक की हत्या बताकर लोगों को जेल भेजा गया, वह दो महीने बाद जिंदा थाने पहुंचा

जशपुर (छत्तीसगढ़):

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले (Jashpur murder case) से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि पुलिस जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस युवक को पुलिस ने बेरहमी से हत्या कर जला देने का शिकार बताया, उसी युवक ने करीब दो महीने बाद जिंदा पुलिस थाने में प्रवेश किया। इस एक घटना ने पूरी हत्या की कहानी को पलट कर रख दिया।

अब सबसे बड़ा और डरावना सवाल यह है—तो फिर जिस अधजले शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था?


🔥 जंगल में मिला था अधजला शव

करीब 61 दिन पहले, जशपुर के टुरीटोंगरी जंगल में पुरानानगर और बलाछापर के बीच एक गड्ढे में आधा जला हुआ शव मिला था।
शव का चेहरा और शरीर का बड़ा हिस्सा बुरी तरह झुलसा हुआ था, जिससे उसकी पहचान करना बेहद मुश्किल था।

मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट में मौत को हत्या (हॉमिसाइड) बताया गया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।


👪 परिवार ने शव की पहचान सिमित खाखा के रूप में की

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सितोंगा गांव का रहने वाला युवक सिमित खाखा कुछ समय पहले रोज़गार की तलाश में झारखंड गया था और वापस नहीं लौटा था।

जब अधजला शव सिमित के माता-पिता और भाई को दिखाया गया, तो उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में उसे सिमित खाखा के रूप में पहचान लिया
यही पहचान इस पूरे केस की नींव बन गई।

👉 महत्वपूर्ण तथ्य:
इस पहचान की पुष्टि के लिए कोई DNA टेस्ट नहीं कराया गया


🕵️‍♂️ पुलिस ने गढ़ी पूरी हत्या की कहानी

परिवार की पहचान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने हत्या की पूरी कहानी तैयार कर ली।

पुलिस के अनुसार:

  • 17 अक्टूबर को सिमित अपने साथियों रामजीत राम, वीरेंद्र राम और एक नाबालिग के साथ जशपुर लौटा
  • सभी बैंक़ी नदी पुलिया के पास शराब पी रहे थे
  • कमीशन के पैसे को लेकर विवाद हुआ
  • रामजीत ने चाकू से और वीरेंद्र ने लोहे की रॉड से हमला किया
  • सिमित की मौके पर ही मौत हो गई
  • सबूत मिटाने के लिए शव को जंगल में गड्ढे में डालकर पेट्रोल से जलाया गया

🚔 गिरफ्तारियां, कबूलनामे और जेल

पुलिस ने:

  • रामजीत राम
  • वीरेंद्र राम
  • एक नाबालिग
  • बाद में शीटल मिंज और जीतू राम को गिरफ्तार किया

पुलिस का दावा था कि आरोपियों ने कबूलनामा किया, घटना स्थल की निशानदेही कराई और मजिस्ट्रेट के सामने वीडियो रिकॉर्डिंग में बयान दिए।

इसके बाद सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस समय तक पुलिस को लगा कि केस सुलझ चुका है।


⚡ रविवार को सब कुछ पलट गया

रविवार को अचानक सिमित खाखा जिंदा हालत में जशपुर कोतवाली थाने पहुंचा
उसके साथ गांव की सरपंच कल्पना खलखो भी थीं।

एक ऑटो चालक ने सिमित को पहचान लिया और बताया कि उसकी “हत्या” के आरोप में कई लोग जेल में हैं। इसके बाद उसे सीधे थाने लाया गया।


🗣️ “मैं काम के लिए झारखंड गया था” – सिमित खाखा

पुलिस को सिमित ने बताया:

  • वह मजदूरी के लिए झारखंड गया था
  • रांची पहुंचने के बाद साथियों से बिछड़ गया
  • गिरिडीह में खेत मजदूरी करने लगा
  • उसके पास मोबाइल नहीं था, इसलिए परिवार से संपर्क नहीं हो सका
  • क्रिसमस मनाने घर लौट रहा था, तभी रास्ते में पता चला कि उसे मृत घोषित कर दिया गया है

उसने साफ कहा कि उसे किसी हत्या या जले शव की कोई जानकारी नहीं है


❓ अब सवाल—वह शव किसका था?

इस खुलासे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता रमेश शर्मा ने सवाल उठाया:

“अगर सिमित जिंदा है, तो वह अधजला शव किसका था जिसे दफनाया गया?”

उन्होंने DNA जांच के बिना की गई पूरी कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई।


🧑‍⚖️ पुलिस का बयान, SIT गठित

जशपुर के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि:

  • एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है
  • मृतक की वास्तविक पहचान की जांच की जाएगी
  • जेल भेजे गए लोगों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है

उन्होंने माना कि शुरुआती कार्रवाई उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर की गई थी।


🔍 असली मृतक की तलाश शुरू

अब पुलिस:

  • झारखंड और ओडिशा में लापता व्यक्तियों की सूची खंगाल रही है
  • आशंका है कि शव किसी अन्य राज्य के व्यक्ति का हो सकता है

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि DNA जांच के बिना इतनी बड़ी कार्रवाई करना बेहद चिंताजनक है


🧠 सिस्टम पर गहरा सवाल

सिमित खाखा घर लौट आया है, लेकिन:

  • निर्दोष लोग हफ्तों जेल में रहे
  • एक अज्ञात व्यक्ति की मौत अब भी रहस्य है

यह मामला सिस्टम पर एक कड़वा सवाल छोड़ जाता है—
एक गलत पहचान कितनी ज़िंदगियां बर्बाद कर सकती है?

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