61 दिन बाद जिंदा लौटा ‘मृतक’: छत्तीसगढ़ में हत्या केस ने लिया चौंकाने वाला मोड़

रायपुर।
Chhattisgarh Murder Case Twist: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक हत्या मामले की जांच उस वक्त पूरी तरह पलट गई, जब जिस व्यक्ति को पुलिस और परिजन मरा हुआ मान चुके थे, वही जिंदा थाने पहुंच गया
यह घटना न सिर्फ पुलिस बल्कि पूरे इलाके के लिए हैरानी का सबब बन गई है।


61 दिन पहले दफनाया गया था शव

पुलिस के अनुसार, सितोंगा गांव निवासी सिमित खाखा पिछले साल अक्टूबर में अपने कुछ परिचितों के साथ काम की तलाश में झारखंड के गिरिडीह गया था।
जब वह वापस नहीं लौटा, तो परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई।

कुछ दिनों बाद जंगल में एक जला हुआ शव मिला, जिसे सिमित का मानते हुए पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया।
परिजनों ने भी शव की पहचान सिमित के रूप में कर ली और अंतिम संस्कार कर दिया गया।


चार लोग गिरफ्तार, हत्या का आरोप

पुलिस ने इस मामले में सिमित के ही चार परिचितों को गिरफ्तार किया।
आरोप था कि—

  • 17 अक्टूबर को शराब के नशे में विवाद हुआ
  • इसी दौरान सिमित की हत्या कर दी गई
  • बाद में शव को जंगल में जला दिया गया

पुलिस का दावा था कि आरोपियों ने हत्या की “स्वीकारोक्ति” भी की थी।
चारों आरोपी तभी से जेल में हैं और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा था।


अचानक थाने पहुंचा ‘मृतक’

मामले ने उस वक्त सनसनीखेज मोड़ लिया, जब 61 दिन बाद खुद सिमित खाखा जशपुर के एक थाने पहुंच गया
उसने पुलिस को बताया कि—

  • वह गिरिडीह में दिहाड़ी मजदूरी कर रहा था
  • उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि
    • उसे मृत मान लिया गया है
    • उसका अंतिम संस्कार भी हो चुका है
    • चार लोग उसकी “हत्या” के आरोप में जेल में हैं

सिमित की बात सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।


अब सवालों के घेरे में पूरी जांच

सिमित के जिंदा मिलने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—

  • जंगल में मिला शव आखिर किसका था?
  • बिना पुख्ता पहचान के शव को दफनाने की अनुमति कैसे मिली?
  • कथित चश्मदीदों के बयान कितने विश्वसनीय थे?
  • क्या जांच में गंभीर लापरवाही हुई?

SIT गठित, जांच के आदेश

जशपुर के एसएसपी एस.एम. सिंह ने बताया कि—

“मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।
अब मृतक की वास्तविक पहचान की जाएगी और जांच में हुई संभावित प्रक्रियागत चूक की भी जांच होगी।”

SIT यह भी जांच करेगी कि आरोपियों से ली गई कथित स्वीकारोक्ति कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं


निर्दोषों की रिहाई पर टिकी नजरें

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  • क्या जेल में बंद चारों आरोपी निर्दोष हैं?
  • अगर हां, तो उनके साथ हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी होगी?

इस मामले ने एक बार फिर पुलिस जांच की विश्वसनीयता और प्रक्रियात्मक सावधानी पर बहस छेड़ दी है।


🔎 निष्कर्ष

Chhattisgarh Murder Case Twist न सिर्फ एक चौंकाने वाली घटना है, बल्कि यह बताती है कि किसी भी आपराधिक जांच में पहचान और सबूत कितने अहम होते हैं।
अब SIT की रिपोर्ट से ही साफ होगा कि गलती कहां और कैसे हुई।

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