EOW की पूरक चार्जशीट में चैतन्य बघेल का नाम, 250 करोड़ के अवैध लेनदेन का दावा

रायपुर।
Chhattisgarh liquor scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की ताजा कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। EOW ने इस मामले में करीब 3800 पन्नों की पूरक चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की है। इस चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का नाम सीधे तौर पर सामने आया है।

जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले से जुड़े कथित सिंडिकेट के माध्यम से चैतन्य बघेल तक 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध राशि पहुंचाई गई। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है, जब यह मामला पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW दोनों की जांच के दायरे में है।


🔍 शराब घोटाले की समानांतर व्यवस्था का दावा

EOW की पूरक चार्जशीट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में शराब की होलसेल बिक्री के लिए एक समानांतर और अवैध सिस्टम तैयार किया गया था।
इस सिस्टम के जरिए सरकारी नियमों और नियंत्रण व्यवस्था को दरकिनार कर भारी पैमाने पर अवैध वसूली की गई।

जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में

  • राजनीतिक संरक्षण
  • अफसरशाही की भूमिका
  • और निजी कारोबारी सिंडिकेट

तीनों की सक्रिय भागीदारी रही।


📂 चार्जशीट में किन-किन नामों का जिक्र

EOW की चार्जशीट में जिन नामों का उल्लेख किया गया है, वे पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • सौम्या चौरसिया (पूर्व उप सचिव)
  • अनवर ढेबर (कारोबारी)
  • निरंजन दास (हाल ही में गिरफ्तार)

अब चैतन्य बघेल का नाम जुड़ने के बाद यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है।


💰 कैश, कमीशन और बेनामी चैनल

EOW का दावा है कि शराब कारोबार से जुड़े अवैध लेनदेन को पूरी तरह संगठित तरीके से अंजाम दिया गया
चार्जशीट में निम्न बिंदुओं का उल्लेख किया गया है:

  • तय कमीशन सिस्टम
  • बड़े पैमाने पर कैश ट्रांजैक्शन
  • बेनामी खातों और चैनलों का इस्तेमाल
  • हर स्तर पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा

जांच एजेंसी के अनुसार, यह कोई बिखरा हुआ अपराध नहीं, बल्कि पूरी तरह से मैनेज किया गया सिंडिकेट था।


⚖️ राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

चार्जशीट में चैतन्य बघेल का नाम सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाला अब जांच के नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है।
राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल, इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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