SAIL बोकारो के GM कौस्तुभ बसु दुष्कर्म आरोप में गिरफ्तार, छत्तीसगढ़ पुलिस ने बोकारो से लिया हिरासत में

बोकारो।

SAIL Bokaro GM rape case: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के बोकारो प्लांट से जुड़ी एक गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस के महाप्रबंधक कौस्तुभ बसु को दुष्कर्म के आरोप में छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई भिलाई निवासी एक महिला की शिकायत के आधार पर की गई है।

यह मामला अब SAIL Bokaro GM rape case के रूप में चर्चा में है और जांच छत्तीसगढ़ में जारी है।


🚔 भिलाई पुलिस की टीम बोकारो पहुंची

जानकारी के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद दुर्ग जिले की भिलाई पुलिस बुधवार देर रात बोकारो पहुंची। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में GM कौस्तुभ बसु को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि बोकारो के एसपी हरविंदर सिंह ने की है।


🏥 मेडिकल जांच के बाद भिलाई ले जाया गया

हिरासत में लेने के बाद—

  • आरोपी का मेडिकल परीक्षण बोकारो सदर अस्पताल में कराया गया
  • इसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस उन्हें भिलाई अपने साथ ले गई

अब आरोपी को कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।


🏢 बोकारो स्टील प्लांट में तैनात हैं GM बसु

आरोपी कौस्तुभ बसु—

  • वर्तमान में बोकारो स्टील प्लांट में GM के पद पर कार्यरत हैं
  • बोकारो के सेक्टर-5 में निवास करते हैं
  • इससे पहले वे भिलाई स्टील प्लांट में भी सेवाएं दे चुके हैं

बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता महिला भी भिलाई की निवासी है और दोनों के बीच पहले से परिचय था।


👮 बोकारो पुलिस ने की पुष्टि

सेक्टर-6 थाना प्रभारी संगीता कुमारी ने बताया कि—

  • मामला छत्तीसगढ़ में दर्ज है
  • जांच की पूरी प्रक्रिया वहीं से संचालित हो रही है
  • बोकारो पुलिस केवल समन्वय और सहयोग की भूमिका निभा रही है

⚖️ आरोपी ने आरोपों को बताया निराधार

थाने में पूछताछ के दौरान GM कौस्तुभ बसु ने—

  • अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया
  • कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है
  • दावा किया कि सच्चाई सामने आने पर वे निर्दोष साबित होंगे

फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और जांच जारी है।


SAIL जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी ने औद्योगिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजरें अदालत की कार्यवाही और पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सके।

⚠️ नोट: कानून के अनुसार आरोपी तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अदालत दोष सिद्ध न करे।